प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार से टोटल लॉकडाउन है. भारी पुलिस बल शहरों की सड़कों पर मौजूद है. प्रशासन ने केवल मेडिकल स्टोर, दूध पार्लर और गैस एजेंसी को खुले रहने की छूट दी है. यहां तक की सब्ज़ी दुकान और किराना दुकानें तक प्रशासन ने बंद करा दी है. यह सख़्ती केंद्र सरकार के गाइडलाइन के ख़िलाफ़ भी है जिसमें ज़रूरी चीज़ों की दुकानों को छूट दी गई है. लेकिन भोपाल प्रशासन इन सब के ख़िलाफ़ जाते हुये एकतरफ़ा फ़ैसला ले रहा है. भोपाल कलेक्टर तरुण पिथोड़े से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जिस तरह से अचानक तेज़ी भोपाल में देखी गई इस वजह से हमें यह क़दम उठाना पड़ा. तरुण पिथोड़े ने bताया, भोपाल में तेज़ी से मामले बढ़े हैं. सब्ज़ी बेचने वाले एक व्यापारी में भी कोरोना पाया गया है. इस स्थिति में वो किस किस के संपर्क में आया होगा यह पता लगाना बहुत मुश्किल है. इसलिये ये क़दम उठाना पड़ रहा है. भोपाल में सोमवार को भी 14 मरीज़ पॉजिटिव पाये गये हैं. वहीं बड़ी तादाद में तब्लीग़ी जमात से संबंध रखने वाले लोग भी पॉजिटिव आये हैं. इस वजह से प्रशासन को पूर्ण लॉकडाउन ही कारगर उपाय नज़र आ रहा है. भोपाल में पॉजिटिव पाये गये लोगों में बड़ी तादाद में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हैं. अभी सभी का इलाज चल रहा है. लेकिन कर्मचारियों के पॉजिटिव निकलने का सिलसिला जारी है. भोपाल के साथ ही इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में भी टोटल लॉकडाउन चल रहा है. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम ने छापने की शर्त पर बताया कि इस वक़्त प्रशासन के पास लॉकडाउन के अलावा कुछ अन्य उपाय नहीं समझ में आ रहा है इसलिये यह क़दम उठा रहे हैं. उन्होंने कहा, लॉकडाउन दूसरे मुल्कों में कारगर साबित हुये हैं. इसलिये कोशिश यही है कि उसका सख्ती से पालन कराया जाए. लेकिन उनका कहना है कि यह अब तक इंदौर में उतना कारगर साबित नहीं हुआ है और मरीज़ों की तादाद लगातार बढ़ रही है. भोपाल में रविवार को जैसे ही लोगों को सोमवार से दुकानों के बंद होने की बात चली तो लोगों की भीड़ सड़कों पर उमड़ पड़ी. हर किराना दुकान और मॉल के बाहर भीड़ लग गई. कम ही लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये नज़र आये. कई लोगों का मानना है कि हर चंद दिनों में नये आदेश की वजह से आम लोगों में पैनिक की स्थिति देखी जा रही है और जब भी सामान लोगों को मिल रहा है वो उसे इकट्ठा करने में लगे हैं. शहर के नये इलाक़े यानी नये भोपाल में रहने वाले उदय सिंह कहते है, कई लोग ज़रूरत से ज़्यादा सामान ले रहे हैं तो कई को सामान ही मुहैया नहीं है. लोग इसी आशंका में जी रहे हैं कि आगे क्या होगा. शहर के एक अन्य व्यक्ति अशीष पाण्डेय ने बताया, रविवार शाम को ख़बर जैसे ही पता चली तो मैं आटा लेने भागा. लेकिन दुकानों के सामने इतनी भीड़ थी कि मुझे आटा नहीं मिल पाया. उन्होंने बताया कि जिसे जो मिला उसने उसे ले लिया सिर्फ इसलिये कि आगे क्या होगा. दुकानदारों ने भी जमकर ऊंचे दामों पर सामान बेचा. हालांकि प्रशासन ने इस तरह के दुकानदारों की शिकायत करने के लिये नंबर जारी किये हैं. लेकिन मुश्किल के इस समय में यह देखा जा रहा है कि लोग शिकायत के बजाय अपने लिये सामान लेना बेहतर समझ रहे है भले ही महंगे दामों में. वहीं शहर के पुराने इलाक़े में रहने वाले लोगों पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने सख़्ती से अब तक लॉकडाउन का पालन नहीं किया जिसकी वजह से इस तरह के हालात बन रहे हैं. लेकिन पुराने भोपाल में रहने वाले अंसार कुरैशी इसे ग़लत बता रहे है. उन्होंने कहा, "अगर देखा जाए तो कुछ लोग हर इलाक़े में अभी तक इसका पालन नहीं करते हुये देखे गये लेकिन जो मामले शहर में आ रहे हैं वो या तो जमात से ताल्लुक़ लोगों के हैं या फिर स्वास्थ्य विभाग के हैं. वो कहते हैं इसके लिये आम लोगों को दोष देना ठीक नहीं होगा. वहीं सरकार ने लोगों की मदद के लिये कुछ जगहों के नंबर जारी किये गए हैं जहां से सामान घर पर मंगाये जा सकते हैं. लेकिन उनमें से ज़्यादातर के पास या तो सामान नहीं हैं या फिर वो सामान की डिलेवरी सभी जगह उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हैं. वहीं दूसरी समस्या ग़रीब लोगों को आ रही है जो अपने बजट के हिसाब से क़रीब की किराना दुकान से सामान ख़रीदते हैं. उन्हें अब तक मुंह मागें दामों पर सामान लेना पड़ रहा था. लेकिन अब वो भी उन्हें उपलब्ध नहीं हैं. घरों पर काम करके अपना गुज़र बसर करने वाली अनार बाई कहती हैं, "हमारे पास इतना पैसा ही नहीं रहता कि हम सामान इकट्ठे कर सकें, अब हमारे लिये बहुत मुश्किल है. दुकानें बंद पड़ी हैं. प्रशासन का मानना है कि शहर में कम्युनिटी ट्रांसमिशन का ख़तरा बढ़ चुका है. इसलिये यह ज़रूरी है कि इस तरह के कदम उठाए जायें. प्रशासन के जारी आदेशों का अगर कोई उल्लंघन करता पाया गया तो फौरन उसकी गिरफ्तारी की जाएगी. वहीं दूध लेने के लिये भी जाना है तो व्यक्ति को पैदल ही नज़दीकी दूध के बूथ पर जाना होगा. सरकार ने निजी वाहन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है. इसमें सिर्फ इमरजेंसी में लगे वाहनों की ही आने जाने की छूट दी जाएगी. वहीं शहर में मिले मरीज़ों के बाद सरकार ने कई क्षेत्रों को कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित किया है. उस क्षेत्र का व्यक्ति बाहर नहीं निकल सकता है या बाहर का व्यक्ति उस क्षेत्र में नहीं जा सकता है. अगर इस तरह कोई भी पाया गया तो फौरन उसकी गिरफ्तारी की जाएगी. शहर में बन रहे हालात को देखते हुये यह महसूस किया जा सकता है कि लोगों को आने वाले दिनों में ज़रूरी सामान की किल्लत का सामना करना पड़ेगा. वहीं शहर की कई कॉलोनियों और क्षेत्रों को भी इस तरह से बंद कर दिया गया है कि बाहर के लोग न वहां जा सकें और न ही अंदर के लोग ही बाहर आ सकें.
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