शौचालय घोटाले की जांच करने पहुंचे प्रमुख सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार और पंचायतीराज निदेशक किंजल सिंह के सामने विभाग ने सोमवार को यह स्वीकार कर लिया कि जिले में धनराशि का भुगतान होने के बाद भी 25,000 शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया है।
इस पर प्रमुख सचिव ने डीएम को पूरे मामले की जांच कराकर शौचालय की धनराशि हजम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। उधर, विभाग में 68.81 करोड़ रुपये डंप होने पर 30 मार्च तक सदुपयोग करने को कहा है।
जिले में स्वच्छ भारत मिशन योजना की हकीकत देखने के लिए सोमवार को प्रमुख सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार पंचायतीराज निदेशक किंजल सिंह के साथ बेल्हा आ धमके। स्वच्छ भारत मिशन के वार रूम में डीएम डा. रूपेश कुमार, सीडीओ डा. अमितपाल शर्मा और डीपीआरओ लालचंद्र गुप्ता की मौजूदगी में प्रमुख सचिव ने डीसी शिवम अवस्थी से शौचालयों की हकीकत पूछी।
डीसी ने बताया कि 4.91 लाख शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इस पर प्रमुख सचिव ने पूछा कि सही बताओ, इसमें कितने शौचालय नहीं बने होंगे। इस पर उन्होंने बताया कि लगभग 25,000 शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ है, जबकि पहली किस्त के रूप में दस-दस हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है। प्रमुख सचिव ने डीएम, सीडीओ से पूरे मामले की जांच कराकर रुपये हजम करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
प्रमुख सचिव ने स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत वर्ष 2017-18 में प्रचार-प्रसार के मद में आए 8.56 करोड़ रुपये के घपले की जांच कराने को कहा है। प्रमुख सचिव ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं था। उन्होंने जल्द ही जांच कराने को कहा है।
सदर विकास खंड के बनवीरकाछ ग्राम पंचायत में लाभार्थी का नाम बिल्ली और पिता का नाम कुत्ता के नाम शौचालय की धनराशि का भुगतान होने का मामला पत्रकारों ने उठाया तो उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने को कहा है।
प्रमुख सचिव के कार्यक्रम को देखते हुए सीडीओ ने सोमवार को सभी जनपद स्तरीय अफसरों की शौचालयों का सत्यापन करने में ड्यूटी लगा दी थी। इससे विकास भवन सोमवार को पूरी तरह खाली रहा। हालांकि शाम तक कोई रिपोर्ट नहीं आई।
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