बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इलाहाबाद संसदीय सीट से मंगलवार देर रात अपना प्रत्याशी घोषित कर कर दिया। जातिगत समीकरणों के आधार पर पार्टी ने रमेश पटेल ‘चितौरी’ पर दांव लगाया है। उनके मैदान में आने से लड़ाई अब त्रिकोणीय हो गई है।
मूलत: जसरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चितौरी निवासी रमेश पटेल पेशे से जिला पंचायत और पीडब्ल्यूडी में ठेकेदारी करते हैं। राजनीति में बहुत सक्रिय नहीं रहे हैं और बसपा के लिए भी बाहरी हैं लेकिन समाज से जुड़े लोगों से उनका गहरा जुड़ाव बताया जाता है। वह अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे चुके हैं और संगठन में काफी सक्रिय भी रहे हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी से टिकट के लिए दो पटेलों ने दावेदारी की थी और दूसरे करछना के राजेश पटेल थे। बसपा सुप्रीमो से मायावती से मुलाकात के बाद टिकट रमेश पटेल के खाते में आया। बसपा ने फूलपुर के बाद इलाहाबाद सीट से भी ओबीसी प्रत्याशी उतारकर लड़ाई को रोमांचक बना दिया है। अब भाजपा के साथ इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के लिए भी चुनौती बढ़ गई है।
दलितों का बड़ा वर्ग बसपा के कैडर वोट के रूप देखा जाता है और नए समीकरण में बसपा अगर मुस्लिमों और पिछड़ों को भी साध लेने में सफल रही तो प्रमुख दलों के लिए चुनौती पेश करेगी। हालांकि, इलाहाबाद सीट से भाजपा और इंडिया गठनबंधन के उम्मीदवार राजनीति में अनुभव के मामले में बसपा उम्मीदवार से आगे हैं लेकिन जातिगत समीकरणों ने लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है।
देर आए दुरुस्त आए....
इलाहाबाद सीट पर रमेश पटेल को बसपा का टिकट मिलने में भले ही देर हुई, लेकिन उन्होंने पर्चा खरीद लिया था। रमेश पटेल के मुताबिक उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने के संकेत पहले ही मिल चुके थे।
शनिवार को दोनों सीटों पर नामांकन की तैयारी
इलाहाबाद और फूलपुर सीटों पर बसपा के उम्मीदवारों के शनिवार को नामांकन दाखिल करने की तैयारी है। इलाहाबाद से रमेश पटेल और फूलपुर से जगन्नाथ पाल शनिवार को ही पर्चा दाखिल कर सकते हैं।
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