आज कल जहां धार्मिक आयोजनों का भी लाभ उठाने को हर कोई हर प्रकार का हथकंडा अपनाने से नहीं चूकता वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो खामोशी से नेक काम कर भी जाते हैं और दूसरे कान को पता भी नहीं चलता।ऐसा ही करैली में एक रेस्टोरेंट में विधि छात्रों की संस्था एक सोच द्वारा हज़रत अली की शहादत पर गरीब बच्चों ,विकलांग महिलाओं व पुरुषों का रोज़ा इफ्तार पार्टी कराई गई। समाजसेवी सैय्यद मोहम्मद अस्करी ने बताया कि आम तौर पर लोग बड़े घराने ,पैसे वाले या फिर ऊंची पहुंच रखने वालों या राजनीतिक लोगों ,अधिवक्ताओं व प्रशासनिक व्यक्ति को ही इस प्रकार के आयोजन में बुलाते हैं और फोटो शूट सहित तमाम आडम्बर का तामझाम भी दिखाया जाता है।कोई ग़रीब अगर आप भी जाए तो उसे बचा खुचा ही पकड़ा दिया जाता है।यह हर समाज में देखा जा सकता है।लेकिन बधाई के पात्र हैं सैय्यद अब्बास हुसैन एडवोकेट जिन्होंने विधि की पढ़ाई करते हुए ही अपने जेब खर्च से एक सोच संस्था के बैनर तले कोरोनाकाल से लेकर अब तक बराबर गरीबों के उत्थान के लिए अग्रसर रहते हैं।अब्बास हुसैन का कहना है कि नेकी कमाने का वक़्त सिर्फ जवानी है। लेकिन अफसोस यह है कि हम नेकी उस वक़्त करते हैं जब बुराई के क़ाबिल भी नहीं रह जाते।रोज़ा इफ्तार में एक सोच संस्था के साथ डॉ क़दीर , मोहसिन इस्लाम ,आरिश हसन ,सैफ सिद्दीकी ,अहमर नक़वी ,शुजा अब्बास ,अहद अंसारी ,हशम अंसारी ,आशूतोष कुमार श्रीवास्तव ,सकीना रिज़वी आदि शामिल रहे।
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