माघ मेला में इस बार शिविरों की बसावट का बुरा हाल है। कहीं सामान नहीं मिल रहा है तो कहीं टिन घेरा, बांस-बल्ली गिराए जाने के पखवारे भर बाद भी शिविर नहीं लग सके हैं। कुछ शिविर कागज पर ही हैं। एक संस्था संचालक को चार दिन पहले टेंट लगने की सूचना दी गई, लेकिन मंगलवार की देर रात तक वहां कोई नहीं पहुंचा था। माघ मेला के प्रभारी अधिकारी दयानंद प्रसाद कहते हैं कि समस्या का जल्द समाधान कराएंगे।
सेक्टर पांच में समया माई मार्ग पर विमल होम्यो सदन ट्रस्ट को 40 फीट चौड़ी और 60 फीट लंबी भूमि आवंटित हुई है। 24 जनवरी को इस संस्था के संचालक डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को सुविधा पर्ची जारी कर दी गई। 28 जनवरी की शाम को वहां सोनपुर बिहार के पते पर पंजीकृत टेंट प्रदाता कंपनी पिरामिड फैवकॉन इवेंट मैनेजर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से सामान भी गिरवा दिया गया, लेकिन कंपनी कर्मचारी वहां मंगलवार रात तक नहीं पहुंचे।
डॉ. प्रदीप बताते हैं कि सामान गायब होने के डर से वह इस ठंड में दिन-रात पहले पहरा देते रहे। फिर, सामान पास के ही एक शिविर में रखवा दिया, ताकि गायब होने से बचाया जा सके। वह बताते हैं कि टेंट प्रदाता कंपनी के प्रंबधक अभय मालवीय चार दिन पहले ही वहां शिविर लगा दिए जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन अभी तक वहां बांस-बल्ली तक नहीं लग सका है। मेलाधिकारी कार्यालय को शिकायत करके भी चक्कर काट रहे हैं।
इसी तरह सेक्टर तीन में काली मार्ग पर डॉ. प्रकाश चंद्र मिश्र का शिविर लगाने के लिए 26 जनवरी की तिथि टेंट प्रदाता कंपनी लल्लूजी एंड संस की ओर से निर्धारित की गई थी। वहां आठ छोलदारी, एक स्टोर, एक स्विस कॉटेज, पांच ईपी टेंट, 300 रनिंग फीट टिन घेरा लगना था, लेकिन कल्पवासी पहुंच जाने के बावजूद अभी तक शिविर लगना तो दूर, सामान ही नहीं पहुंच सका है। भूमि आवंटन के बाद ऐसे कई टेंट और भी नहीं लगे हैं।
सुविधा पर्ची जारी होने के बावजूद टेंट कंपनी जहां शिविर स्थापित नहीं कर सकी है, ऐसे प्रकरणों को गंभीरता से लिया जा रहा है। अविलंब शिविर स्थापित कराकर यह सुनिश्चित कराएंगे कि जिन्हें सुविधा पर्ची जारी हो गई है, उन्हें भूमि माप के अनुसार टिन घेरा और अनुमन्य सुविधाएं दी जाएं। - दयानंद प्रसाद, प्रभारी मेलाधिकारी, माघ मेला
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