सूर्य में कुछ भी ठोस नहीं है और वह प्लाज्मा से बना है। चुंबकीय बल रेखाओं और प्लाज्मा के साथ मिलने पर होने वाले विस्फोट की तीव्रता का पता लगाने के लिए मिशन पर भेजा गया आदित्य एल-1 विस्फोट की तीव्रता का पता लगाकर मोबाइल, सेटेलाइट टीवी जैसे संचार के माध्यमों के लिए वरदान साबित होगा। साथ ही वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के मौसम में पल-पल होने वाले बदलाव की भी जानकारी देगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के शताब्दी वर्ष समारोह के मौके पर मेघनाथ शाहा स्मृति कार्यशाला में देश के विभिन्न संस्थानों से आए वैज्ञानिकों ने यह जानकारी छात्रों से साझा की। उन्होंने बताया कि आमतौर पर चुंबकीय बल रेखाएं और प्लाज्मा अलग होता है, लेकिन सूर्य पर चुंबकीय बल रेखाएं एक गुब्बारे के रूप में प्लाज्मा को अपने भीतर लेकर घूमती रहती हैं।
इस गुब्बारे में जब विस्फोट होता है तो अंतरिक्ष के मौसम से लेकर पृथ्वी का वायुमंडल तक प्रभावित होता है। अगर विस्फोट ज्यादा तीव्र हुआ तो सेटेलाइट को नुकसान पहुंच सकता है और इसकी वजह से संचार के माध्यम ठप हो सकते हैं। सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में लैग्रांज कक्षा में स्थापित होने के बाद आदित्य एल-1 विस्फोट की तीव्रता को परख लेगा और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां वैज्ञानिकों को भेजेगा।
न केवल भारत, बल्कि दुनिया के कई देशों से अंतरिक्ष में सेटेलाइट भेजे जा रहे हैं। अगर सेटेलाइट को नुकसान होता है तो काफी पीछे चले जाएंगे। ऐसे में पूरी तरह से स्वदेशी मिशन आदित्य एल-1 विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि साबित होने जा रहा है।
आयुका से आए वैज्ञानिक प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी ने कहा कि सौर वातावरण में ऊर्जावान विस्फोट की घटनाएं होती हैं, ये घटनाएं अंतरिक्ष के मौसम और पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित एवं नियंत्रित करती हैं। मनुष्यों की लगातार बढ़ती अंतरिक्ष गतिविधियों की बेहतरी के लिए सौर वातावरण में उत्पन्न होने वाली विस्फोटक घटनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
वैज्ञानिक प्रो. निशांत ने मैग्नेटो हाइड्रोडायनेमिक्स के बुनियादी सिद्धांतों के बारे में बताया, जो भौतिकी की एक शाखा है और चुंबकीय प्लाज्मा से संबंधित है। आईआईटी बीएचयू वाराणसी के प्रो. अभिषेक श्रीवास्तव ने चुंबकीय पुनः संयोजन, अल्फवेन तरंग आदि पर चर्चा की। एआरआईईएस नैनीताल के वैज्ञानिक डॉ. वैभव पंत ने बताया कि ऊर्जावान विस्फोट से रेडियो ब्लैक आउट के कारण संचार बाधित हो सकता है। हमें सूर्य से संबंधित सभी पहलुओं का अध्ययन करने की आवश्यकता है।
subscribe to rss
811,6 followers
6958,56 fans
6954,55 subscribers
896,7 subscribers
6321,56 followers
9625.56 followers
741,9 followers
3548,7 followers