प्रयागराज जंक्शन पर यार्ड रिमॉडलिंग का कार्य अगले माह शुरू करने की तैयारी की गई है। यह कार्य तकरीबन तीन माह तक चलेगा। इस अवधि में प्रयागराज जंक्शन आने वाली कई ट्रेनों को डायवर्ट किया जाएगा। कुछ ट्रेनों को वाया ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ( ईडीएफसी) रूट पर चलाया जाएगा। साथ ही जंक्शन से शुरू होने वाली ट्रेनें सूबेदारगंज एवं छिवकी से संचालित किए जाने की भी योजना है।
महाकुंभ से पहले दिसंबर 2024 तक रेलवे प्रशासन को मिशन रफ्तार के तहत दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रति घंटा करनी है। इसके लिए यार्ड की रिमॉडलिंग जरूरी है। प्रयागराज जंक्शन और कानपुर सेंट्रल रेलवे के यार्ड रिमॉडलिंग का कार्य मिशन रफ्तार योजना के तहत ही होना है। रेलवे की योजना है कि निरंजन पुल के चौड़ीकरण के साथ अब अगले माह से द्वारा यार्ड रिमॉडलिंग का कार्य भी शुरू कर दिया जाए।
गर्मी के कारण इस समय कई स्पेशल ट्रेनें संचालित हो रही हैं। इसलिए यह कार्य जुलाई से सितंबर तक करवाने की तैयारी है। क्योंकि इस अवधि में जहां मालगाड़ियों की आवाजाही कम हो जाती है तो वहीं दूसरी ओर स्पेशल ट्रेनों का संचालन भी न के बराबर होता है। इस बारे में एनसीआर के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय का कहना है कि अगले माह से यह कार्य होना प्रस्तावित है। हालांकि तिथि अभी तय नहीं है। कार्य के दौरान ट्रेनों को डायवर्ट किया जाएगा। ईडीएफसी से भी उन्हें संचालित किया जा सकता है।
बांदा, मानिकपुर और लखनऊ, वाराणसी होकर चलाई जा सकती हैं ट्रेनें
प्रयागराज जंक्शन पर यार्ड रिमॉडलिंग के दौरान दिल्ली-हावड़ा रूट की कुछ ट्रेनें प्रयागराज छिवकी से मानिकपुर, बांदा होते हुए कानपुर एवं कुछ को पंडित दीन दयाल उपाध्याय से वाराणसी, लखनऊ के रास्ते कानपुर डायवर्ट किया जा सकता है। इसके अलावा प्रयागराज जंक्शन से शुरू होने वाली कुछ ट्रेनें सूबेदारगंज से एवं मुंबई रूट की ट्रेनें प्रयागराज छिवकी रेलवे स्टेशन से शुरू की जा सकती हैं।
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