दिल की धड़कनों पर खौफ का साया घना होता जा रहा है। आंकड़े पैर से जमीन खिसका देने वाले हैं। अकेले मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरूअस्पताल में पिछले दो साल में हार्ट अटैक के शिकार पांच हजार मरीज आ चुके हैं। हृदय रोग विशेषज्ञों की मानें तो इसके पीछे की सबड़े बड़ी वजह अनियमित दिनचर्या और तनाव है। स्वस्थ जीवन शैली को अपनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है।
मौसम बदलने और ठंड का असर कम होने के बाद भी हार्ट अटैक के मामलों में तेजी आ रही है। सोमवार को हृदय रोग विभाग की ओपीडी में दिल के 150 से अधिक मरीज आए। इनमें से 27 मरीज हार्ट अटैक के रहे। दिल का दौरा पड़ने वाले 15-20 मामले प्रतिदिन स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल पहुंच रहे हैं। हृदय रोग विभाग के पिछले दो वर्ष के आंकड़े माथे पर बल डाल देने वाले हैं। इस अवधि में पांच हजार से अधिक हार्ट अटैक के मरीजों आ चुके हैं।
दिल का दौरा पड़ने की बढ़ती यह दर चिंताजनक कही जास रही है। खास बात यह है कि जिन लोगों को दिल का दौरा पड़ रहा है, उनमें कम उम्र के युवा भी शामिल हैं। एसआरएन के हृदय रोग विशेषज्ञ ड़ॉ. अभिषेक सचदेवा का कहना है कि दिल का दौरा पड़ने की बीमारी अनियमित दिनचर्या की वजह से खरतनाक रूप ले रही है। लोग भागमभाग की जिंदगी में बिना रुके , बिना आराम किए सिर्फ काम किए जा रहे हैं।
न काने की फुर्सत न सोने की। ऐसे में तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी वजह से रक्तचाप बढ़ने के साथ ही खून गाढ़ा होने से दौरे पड़ रहे हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शाहिद बताते हैं कि एसआरएन अस्पताल में आ रहे दिल के मरीजों में युवाओं की संख्या कम नहीं है। ऐसे में युवाओं की सांसें थमने के भी मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लोगों को कब और कहां अटैक आ जाए, यह भी कहा नहीं जा सकता।
कहीं गाते तो कहीं नातचे समय दौड़ा पड़ने से मौतें हो जा रही हैं। बीते शनिवार को सिविल लाइंस में साली की सालगिरह में नाचते समय दवा कारोबारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। चिकित्सकों का कहना है कि दिनचर्या में सुधार लाने के साथ ही स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना ही इससे बचाव का बेहतर और आसान उपाय है।
कार्डियक अरेस्ट होने पर क्या बरतें एहतियात
सफर के दौरान कार या ट्रेन के किसी कोच में या फिर सड़क अथवा घर पर अगर दिल दौरा पड़ जाए तो वहां मौजूद साथी को तत्काल कार्डियो पल्मनरी रिसेफिटेशन(सीपीआर) देनी चाहिए।
लगातार सीने पर पंप करने और मसाज करने से जीवन चलते रहने की गुंजाइश रहती है।
मुंह से सांस भी देना होता है फायदेमंद।
सार्विटेट की गोली को जीभ के नीचे दबाकर रखने से दर्द में कमी आ जाती है।
तत्काल नजदीकी अस्पताल में मरीज को पहुंचाना चाहिए, जहां आक्सीजन की तत्काल सुविधा मिल सके।
हार्ट अटैक से बचने के उपाय
फास्ड फूड से बचें , हरी सब्जियां और ताजे फल का सेवन करें।
नशे से दूरी बनाएं। सिगरेट और मदिरा पान के अलावा तंबागू, गुटखा के सेवन से दूर रहना कारगर।
सामान्य तौर पर 6-8 घंटे की नींद अवश्य पूरी करें।
योगा, ध्यान करने के साथ पैदल चलना चाहिए, ताकि तमान में कमी आ सके।
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