प्रयागराज : मुफ्त मनोरंजन के साधनों की भरमार के बीच हाशिये पर गए रेडियो के मुरीद विजय मित्तल से मिलिए। जब विविध भारती के लोकप्रिय कार्यक्रम हवा महल, फरमाइशी फिल्म संगीत और क्रिकेट की कमेंट्री पूरे मुहल्ले को सुनाने के लिए उन्होंने अपने हाथ से खुद का रेडियो बना डाला। हस्त निर्मित उनका रेडियो अभी भी उनके पास सलामत है। विश्व रेडियो दिवस पर विजय मित्तल का रेडियो प्रेम चर्चा में है। मीरापुर निवासी इलेक्टि्रक इंजीनियर विजय मित्तल अब तक 22 से अधिक रेडियो बना चुके हैं।
विविध भारती के हास्य झलकियों वाले कार्यक्रम हवा महल, फरमाइशी प्रोग्राम के अलावा कमेंट्री पड़ोसियों और दोस्तों को सुनाने के लिए पहली बार उन्होंने 1986 में रेडियो बनाया था। तब वह लखनऊ से रेडियो इंजीनियरिंग में एक वर्ष का डिप्लोमा कोर्स कर के आए थे। उनके हाथ का बनाया रेडियो पर मीरापुर में बजता था , तब आसपास के मुहल्लों के लोग जमा हो जाते थे। आकाशवाणी से आने वाले समाचार हों या फिर बच्चों, बाल जगत के अलावा महिलाओं का घर-आंगन या फिर गृह लक्ष्मी कार्यक्रम, सभी चाव से चुने जाते थे और नाम विजय मित्तल का होता था। विजय का पहला रेडियो तब बजन लगा तब आसपास के लोगों ने उनसे दूसरा बनाने का आग्रह किया। दोस्तों के अनुरोध पर उन्होंने दूसरा रेडियो बनाया।
विजय मित्तल का रेडियो से लगाव छूटा नहीं है। इस दौर में भी जब टीवी के बाद इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब से लेकर मनोरंजन की अनेक सोशल साइट्स धूम मचा रही हैं, तभ भी रेडियो ही उनका साथी है। वह अब भी रेडियो अपने पास रखते हैं। रेडियो के प्रति उनकी दीवानगी करीब से देखी जा सकती है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विजय ने अपने हाथ के बनाए रेडियो को यादगार निशानी के तौर पर अपने पास सुरक्षित रखा है।
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