वसंत पंचमी पर बृहस्पतिवार को को माघ मेले के खाक चौक में गंगा किनारे अनूठी तपस्या आरंभ हुई। खाक चौक के तपस्वीनगर में त्यागी परंपरा के संतों ने अग्नि का घेरा बनाकर धूना तपस्या और ज्ञान साधना शुरू की। अग्नि के घेरे में कुछ संतों ने सिर पर भी मिट्टी के घड़ों में अग्नि प्रज्जवलित की। जेष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी यानी गंगा दशहरा के दिन इस तपस्या की पूर्णाहुति होगी।
खाक चौक के तपस्वीनगर में बृहस्पतिवार को धूना तपस्या की झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। एक साथ कई संत अग्नि के घेरे में सिर पर घड़ा रखकर ध्यान में लीन रहे। यह अग्नि साधना तपस्वीनगर में माघी पूर्णिमा तक चलेगी।
सात चरणों में होती है अग्नि साधना
अग्नि साधना की बात आते ही वह इसकी महिमा बताने लगते हैं। उनके मुताबिक सात चरणों में होने वाली धूना तपस्या में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे से लेकर 12 घंटे तक संत अग्नि के घेरे में रहते हैं। इस बार खाक चौक में कल्पवास करने वाले ऐसे तपस्वी संतों की संख्या करीब 500 से अधिक है।
लोक कल्याण के लिए की जाती है साधना
धूना तपस्या करने वाले संतों का कहना है कि धूना तपस्या का संकल्प लेने वाले सुबह से शाम तक साधना करेंगे। गंगा दशहरा पर हवन- पूजन कर धुनी को गंगा में विसर्जित किया जाएगा। तपस्या किसी कारण से अगर भंग हो जाती है तो अगले वर्ष नए सिरे से संकल्प लेकर उसे फिर से आरंभ किया जाएगा।
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