सपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरित मानस पर दिए गए बयान पर साधू-संतों, भाजपा नेताओं और अखिल भारतीय हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है और उनसे बयान पर माफी मांगने की अपील की है। हिंदू महासभा ने हजरतगंज और ठाकुरगंज थाने में तहरीर दी है और स्वामी प्रसाद पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
हिंदू महासभा के लोग सोमवार दोपहर स्वामी प्रसाद के घर भी जा रहे थे लेकिन पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोक लिया। सिविल अस्पताल के पास पुलिस व हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
रामचरितमानस पर बिहार के मंत्री की आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद अब समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बयान देकर विवाद को बढ़ा दिया है। सपा नेता ने कहा, रामचरितमानस में दलितों और महिलाओं का अपमान किया गया है। तुलसीदास ने ग्रंथ को अपनी खुशी के लिए लिखा था। करोड़ों लोग इसे नहीं पढ़ते। इस ग्रंथ को बकवास बताते हुए कहा कि सरकार को इस पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
सत्ता न मिलने के कारण स्वामी प्रसाद को पड़ रहा पागलपन का दौरा
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के राम चरित मानस पर प्रतिबंध लगाने और ग्रंथ को बकवास कहने पर विहिप भड़क उठी है। विहिप मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि हिंदू धर्मग्रंथ श्रीरामचरितमानस पर पूर्व मंत्री सपा नेता स्वामीप्रसाद मौर्य जैसे अज्ञानी प्रतिबंध लगाने की बेतुकी बातें कर रहे हैं।
उन्होंने कहा सत्ता ना मिलने के कारण उन्हें पागलपन का दौरा पड़ रहा है। कहा कि रामचरित मानस एक पुस्तक नही यह मानव जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाने का अमृत कुंभ है। अयोध्या को रक्त रंजित करने वालों के हमसफर मौर्य ने श्रीराम भक्तों का अपमान किया है। मानसिक विक्षिप्त श्रीराम विरोधी को तत्काल गिरफ्तार करना चाहिए।
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