आने वालें कुछ वर्षों में भारत के रेलवे स्टेशनों की तस्वीर बदल सकती है. 40 से ज्यादा स्टेशन मॉल में तब्दील हो सकते हैं और इसके लिए रेलवे 17,500 करोड़ के पैकेज की तैयारी कर रही है. ये स्टेशन रूफटॉप प्लाजा से लैस होंगे, जिसमें शॉपिंग सेंटर्स, फूड कोर्ट और रेस्तरां होंगे. रेलवे का ये कदम रेल यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए है.
ब्लूप्रिंट में क्या बताया गया?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे के ब्लूप्रिंट में बताया गया कि कई स्टेशनों को एलिवेटेड रोड से जोड़ा जाएगा और कुछ स्टेशनों में एयर कॉन्कोर्स, फूड कोर्ट और अन्य सुविधाओं के साथ ट्रैक के ऊपर एक जगह और होटल के कमरे होंगे.
उदाहरण के लिए, जैसे सोमनाथ में स्टेशन की छत पर 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक दर्जन शिखर होंगे, जबकि बिहार के गया स्टेशन में तीर्थयात्रियों के लिए एक अलग हॉल हो सकता है. कुछ स्टेशनों को कन्याकुमारी के लिए 61 करोड़ रुपये और नेल्लोर के लिए 91 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि प्रयागराज और चेन्नई जैसे प्रमुख स्टेशनों को क्रमशः 960 करोड़ रुपये और 842 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. ये ब्लूप्रिंट सिर्फ रेलवे के आधुनिकरण के लिए नहीं है. ये प्लान ये भी संकेत करता है कि रेलवे पब्लिक- प्राइवेट पार्टनरशिप को कैसे देखती है.
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अब हम सिर्फ कोर स्टेशन एरिया को विकसित करने में पैसा खर्च कर रहे हैं. अगले दो-तीन वर्षों में उस हिस्से के बनने के बाद हम इन स्टेशनों को बनाए रखने और आसपास के क्षेत्रों में अधिक रियल एस्टेट विकसित करने के लिए निजी कंपनियों से बोलियां आमंत्रित करेंगे.
इस बार रेलवे ने बॉल रोलिंग से पहले जरूरी फंड तैयार कर लिया है. सरकार ने पहले चरण में 46 स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए 17,500 करोड़ रुपये (2021-22 के अनुपूरक बजट में 12,000 करोड़ रुपये और 2022-23 के बजट में 5,500 करोड़ रुपये) मंजूर किए हैं. रेलवे ने बाद के चरण में देश के कुल 9,274 (मार्च 2020 के आंकड़े) में से 300 और स्टेशनों का पुनर्विकास करने की योजना बनाई है.
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