लखनऊ. यूपी में गरजते बुलडोजर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 6 पूर्व जजों ने चीफ जस्टिस एनवी रमणा को पत्र लिखकर योगी आदित्यनाथ सरकार की दमनकारी कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। बीजेपी से निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा के विवादित बयान को लेकर पहले कानपुर और फिर प्रयागराज समेत कई जिलों में जुमे की नमाज के बाद मुसलमानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा और तोड़-फोड़ हुई थी।
इन मामलों में पुलिस ने प्रदेश भर में 300 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए हैं और कुछ जगहों पर आरोपियों के मकान को ध्वस्त कर दिया गया है. पुलिस हिरासत में आरोपियों की पिटाई के वीडियो भी वायरल हुए हैं। चीफ जस्टिस को पत्र लिखने वालों ने आरोपियों को सुने बिना इस तरह एकतरफा एक्शन को कानून के राज के खिलाफ बताया है।
चीफ जस्टिस रमणा को पत्र भेजने वालों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी, जस्टिस वी. गोपाला गौडा, जस्टिस एके गांगुली, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एपी शाह, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस के चंद्रू, कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मोहम्मद अनवर के अलावा वरिष्ठ वकील शांति भूषण, इंदिरा जयसिंह, चंदर उदय सिंह, आनंद ग्रोवर, श्रीराम पंचू और प्रशांत भूषण शामिल हैं।
इन लोगों ने पत्र में राज्य सरकार के दमनकारी एक्शन को कानून का उल्लंघन, नागरिक अधिकारों का हनन और संविधान व मौलिक अधिकारों का मजाक उड़ाना करार दिया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि यूपी में प्रशासन प्रदर्शनकारियों को सुनने और शांति से अपनी बात रखने देने के बदले हिंसक कार्रवाई पर उतर आया है।
पत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उन बयानों का भी हवाला दिया गया है जिसमें योगी ये कहते रहे हैं कि इस तरह की हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों पर ऐसा एक्शन लिया जाएगा कि दूसरों के लिए वो उदाहरण बन जाए और वो डर से ऐसा ना करे। इससे पुलिस को शह मिला है कि वो आरोपियों को बर्बर तरीके से टॉर्चर करने पर उतर आई है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि अवैध प्रदर्शनों में शामिल लोगों पर रासुका और गैंगस्टर एक्ट जैसे कड़े सेक्शन में केस दर्ज किया जा रहा है।
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