प्रयागराज। मत्स्य पालन विभाग की ओर से तीन माह तक के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया है। जून जुलाई और अगस्त माह में प्रजनन अवधि तक नदियों से मछलियां न निकालने का निर्णय लिया गया है। नदियों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने लेकर यह कदम उठाया गया है। गंगा-यमुना समेत जिले की 10 नदियों में मछली पकडऩे पर रोक लगा दिया गया है। मत्स्य पालन विभाग की ओर से इसके लिए निर्देश जारी किए गए हैैं।
टोंस, बेलन, टुडिय़ारी, नैना, गोरमा, लपरी, ससुर खदेरी, वरुणा में भी प्रतिबंध
मत्स्य पालन विभाग की ओर से तीन माह तक के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया है। जून, जुलाई और अगस्त माह में प्रजनन अवधि तक नदियों से मछलियां न निकालने का निर्णय लिया गया है। नदियों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने लेकर यह कदम उठाया गया है। मछली निकालते पकड़े जाने पर मुकदमा दर्ज कराकर गिरफ्तारी भी कराई जा सकती है। इसकी निगरानी के लिए मत्स्य पालन विभाग की ओर से छह टीमें गठित की गई हैैं। साथ ही नदियों के किनारे के गांवों में तैनात लेखपालों, ग्राम विकास अधिकारियों, बीट के सिपाहियों को भी इस पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैैं।
तीन माह तक नहीं पकड़ी जा सकेंगी मछलियां, उल्लंघन पर दर्ज होगा मुकदमा
प्रयागराज में नदियों से लगभग 300 टन मछली हर माह पकड़ी जाती है। इसी तरह तालाबों से हर माह 1000 टन मछली निकाली जाती हैैं। प्रयागराज परिक्षेत्र में गंगा, यमुना और टोंस नदी में कई खास तरह की मछलियां मिलती हैैं। गंगा की परियासी, हिल्सा, बैकरी, सूती, टेंगार तो यमुना की गेगरा मछली की काफी मांग रहती है। यहां से पूर्वांचल व बुंदेलखंड के कई जिलों के साथ ही बंगाल और असोम तक मछली भेजी जाती है। आंध्र प्रदेश से कुछ विशेष किस्म की मछलियां मंगाई भी जाती हैं।
प्रजनन अवधि के दौरान तीन माह तक गंगा-यमुना समेत आठ नदियों में मछली पकडऩे पर प्रतिबंध लगाया गया है। इससे नदियों में मत्स्य पालन बढ़ेगा। इसके उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी। एसआर यादव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालन विभाग, प्रयागराज
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