जीएसटी लागू होने पर बैंकों में वैट का टैक्स जमा न होने पर व्यापारियों को हो रही असुविधा को वाणिज्यकर विभाग दूर कराएगा। जीएसटी और वैट का टैक्स बैंक में अलग-अलग हेड में जमा होगा। कोई भी बैंक वैट का पैसा जमा करने से इन्कार नहीं करेगा। व्यापारियों की सहूलियत के लिए वाणिज्यकर विभाग बैंकों को चिट्ठी भेजेगा।
एक जुलाई से जीएसटी लागू होने पर व्यापारियों को वस्तु एवं सेवाकर को लेकर जो परेशानियां आ रही हैं। वाणिज्यकर विभाग उन्हें धीरे-धीरे दूर कर रहा है। व्यापारियों ने शिकायत की थी कि जीएसटी लागू होने पर बैंक वैट का टैक्स जमा करने से इन्कार कर रहे हैं। यह मामला विभाग के आला अधिकारियों तक पहुंचा। अपर मुख्य सचिव ने सभी जोन के एडिशनल कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वह अपने क्षेत्र के बैंकों को पत्र जारी करके अवगत कराएं कि वैट और जीएसटी का टैक्स उसी के हेड में जमा होगा। कोई भी बैंक पैसा जमा करने से इन्कार न करे। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल का कहना है कि जीएसटी और वैट का टैक्स अलग-अलग हेड में जमा होगा। इलाहाबाद जोन के प्रभारी एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 राम प्रसाद का कहना है कि तीन वर्ष तक वैट मामलों का निस्तारण होगा। इसलिए यह हेड बंद नहीं होगा। बैंकों को चिट्ठी जारी की जा रही है। वैट का टैक्स जमा करें। अगर कोई बैंक इसके बावजूद ऐसा करता है तो व्यापारी विभाग में आकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। तत्काल उसका संज्ञान लिया जाएगा।
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