संगम में लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए पिंडदान की लंबी कतार में मेरी नजर एक मासूम बच्चे पे पड़ी जो सयाद इतना भी नहीं जानता होगा ये रश्म होता किस लिए है। खैर वो बात अलग है पर अपने पुरखों की याद में पिंड दान करता हुआ वो मासूम को ये जानने के लिए कुछ और इतंजार करना होगा ।
कलश स्थापना, आह्वान और अखंड दीप जलाने के साथ बृहस्पतिवार को जगत प्रतिपालिका मां दुर्गा की आराधना का शारदीय नवरात्रि पर्व आरंभ होगा। वर्ष भर के लिए शक्ति संचय, आत्मानुशासन और आत्म शुद्धि के लिए भक्त व्रत, अखंड पाठ के अलावा जप और अनुष्ठान करेंगे। कलश स्थापना की तैयारियों को देर शाम अंतिम रूप दे दिया गया। सुबह प्रतिपदा लगते ही श्रद्धालु मां की आराधना में लीन हो जाएंगे।
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होगी। इसके लिए घरों से लेकर देवी मंदिरों तक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। नारियल, चुनरी, पूजा सामग्री से बाजार सज गए हैं। पूजन सामग्री खरीदने के लिए राजापुर, कटरा, चौक, नखास कोहना, खुल्दाबाद, सुलेम सराय समेत शहर के अन्य इलाकों में भीड़ लगी रही।
पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार प्रतिपदा लगने के बाद कलश स्थापना का मुहूर्त बृहस्पतिवार की सुबह 06:17 से 07:017 बजे तक है। नवरात्रि के व्रत अनुष्ठान करने वालों को कलश स्थापना के लिए घर के उत्तर-पूर्व की दिशा में पूजा स्थल बनाना चाहिए। पूजा स्थल पर सफाई करने के बाद गंगा जल से उसे पवित्र करना चाहिए।
इसके बाद गंगा की मिट्टी से वेदी बनाकर उसे रंगोली या चौरठ की अल्पनाओं से सजाने के बाद जौ की बुवाई करनी चाहिए। फिर उस वेदी पर जल से भरे कलश में नारियल ,चुनरी, द्रव्य, अक्षत, दूर्वा,लौंग, सुपारी, हल्दी की गांठ डालकर मां का ध्यान करें। शारदीय नवरात्रि के नौ दिवसीय अनुष्ठानों की तैयारियों के साथ ही शहर के देवी मंदिरों को भव्य सजा दिया गया है।
मीरापुर स्थित शक्ति पीठ मां कल्याणी देवी, मां ललिता देवी के अलावा अलोपीबाग स्थित मां अलोप शंकरी के मंदिरों को रंग-बिरंगी झालरों और फूलों से सजा दिया गया है। सुबह मंगला आरती के साथ ही इन मंदिरों में मां के प्रथम स्वरूप के रूप में शैलपुत्री की आराधना शुरू हो जाएगी।
तिथि क्षय की वजह से इस बार आठ दिन का होगा नवरात्रि, डोली पर होगा मां का आगमन
इस बार शारदीय नवरात्रि आठ दिन का ही होगा। चतुर्थी तिथि का क्षय होने के कारण ऐसा हो रहा है। 13 अक्तूबर को महाअष्टमी और 14 अक्तूबर को महानवमी का हवन, पूजन होगा। इन दोनों तिथियों में कन्या पूजन हो सकेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार मां दुर्गा डोली में सवार होकर आएंगी। मां के आगमन की यह स्थिति आधी आबादी के वर्चस्व में वृद्धि का सूचक है।
भक्त व्रत-अनुष्ठान में इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए। यानी इस दौरान तामसी आहार ग्रहण नहीं करना चाहिए। कलश स्थापना करने वाले भक्तों को चाहिए कि वह अनुष्ठान के दौरान कहीं यात्रा पर न जाएं।
subscribe to rss
811,6 followers
6958,56 fans
6954,55 subscribers
896,7 subscribers
6321,56 followers
9625.56 followers
741,9 followers
3548,7 followers