आगामी 30 अक्टूबर को 3 लोकसभा और 14 राज्यों में 30 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में एक रोचक मुकाबला हरियाणा के ऐलनाबाद (Ellenabad) सीट पर होने की संभावना है. इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के एकलौते विधायक अभय सिंह चौटाला के किसान आन्दोलन के समर्थन में दिए गए त्यागपत्र से ऐलनाबाद सीट खाली हो गई थी. सिरसा जिले के ऐलनाबाद सीट पर काफी लम्बे समय से INLD का दबदबा रहा है. चुनाव के पहले ही INLD की जीत एक बार फिर से पक्की दिख रही है. फिर भी चुनावों के कभी-कभी अप्रत्याशित परिणाम भी देखने को भी मिल जाते हैं. दिलचस्पी इस बात पर आ कर टिक गयी है कि अगर किसी कारणवश इनेलो की हार हो गयी तो फिर पार्टी का क्या होगा?
16 वर्ष पहले सत्ता में होने के बावजूद इनेलो हरियाणा विधानसभा चुनाव हार गयी थी और फिर पार्टी के पतन का ऐसा सिलसिला शुरू हो गया जो थमने का नाम नहीं ले रहा है. सत्ता से लुढ़कते-लुढ़कते इनेलो विधानसभा में एक विधायक पर आ गई. 2019 के चुनाव में ऐलनाबाद ने इनेलो की लाज बचा ली थी.
ऐलनाबाद में इनेलो के दबदबा का कारण है कि यह क्षेत्र भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के गृह जिला सिरसा के अन्तरगत आता है. पूर्व में यहां से देवीलाल के बड़े बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भी चुनाव जीत चुके हैं और पिछले तीन चुनावों में यहां से चौटाला के छोटे बेटे अभय सिंह की जीत होती रही है. अभय सिंह ने 27 जनवरी को यह सोच कर विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था कि उनके इस कदम से वह बड़े नेता बन जाएंगे.
उन्हें उम्मीद थी कि उनके इस्तीफा के बाद दूसरे दलों के विधायकों पर किसानो का दबाव बनेगा और उन्हें भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. फिर प्रदेश में नए सिरे से विधानसभा चुनाव करवाना पड़ेगा और इनेलो एक बार फिर से एक बड़ी राजनीतिक शक्ति बन जाएगी. पर ऐसा हुआ नहीं और अभय सिंह अलग थलग पड़ गए. अब वह फिर से उपचुनाव जीत कर विधानसभा जाने को ललायित हैं. ऐलनाबाद कृषि प्रधान क्षेत्र है और शायद उपचुनाव में उन्हें इस सवाल का सामना करना पड़ेगा कि उनके इस्तीफा से आन्दोलनकारी किसानों का क्या फायदा हुआ तथा अगर उन्हें फिर से विधायक बनना था तो इस्तीफा दिया ही क्यों था?
अभय सिंह के पिता ओमप्रकाश चौटाला, जो अभी हाल ही में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा काट कर बाहर आए हैं, का दावा है कि ऐलनाबाद से इनेलो की जीत के बाद हरियाणा की राजनीति में भूचाल आ जाएगा, राज्य में बीजेपी-जेजेपी गठबंधन की सरकार गिर जाएगी, मध्यावर्ती चुनाव होगा और इनेलो की सत्ता में वापसी होगी. 86 वर्ष के एक बुजुर्ग नेता का यह एक सपना मात्र लगता है. ऐलनाबाद से जीत या हार से सत्ताधारी गठबंधन की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि ऐलनाबाद को इनेलो का गढ़ माना जाता है. उल्टे, अगर इनेलो उपचुनाव में नाकाम रही तो उसके अस्तित्व पर संकट के काले घने बादल छा जाएंगे. पर इस सबसे से अधिक दिलचस्प एक संभावना है कि शायद इस उपचुनाव में देवीलाल का कुनबा आपस में टकरा सकता है.
आज से नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी जो 8 अक्टूबर तक चलेगी. अभी किसी दल ने अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है. अभय सिंह अपने को जनता का नेता मानते हैं, लिहाजा उनके अनुसार 4 अक्टूबर के एक मीटिंग में ऐलनाबाद की जनता यह तय करेगी कि इनेलो का उम्मीदवार कौन होगा. यह महज एक औपचारिकता है, सभी जानते हैं कि इनेलो का उम्मीदवार कोई और नहीं बल्कि अभय सिंह ही होंगे. अक्टूबर 2019 के विधानसभा चुनाव में देवीलाल का खानदान आपस में नहीं टकराया. इनेलो से अलग हो कर ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय सिंह चौटाला और उनके परिवार ने जेजेपी का गठन किया.
जेजेपी ने एक नीति के तहत ऐलनाबाद से एक कमजोर उम्मीदवार को अपना प्रत्याशी बनाया था जिसकी जमानत जब्त हो गयी थी. एक दूसरे के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ने के कारण देवीलाल परिवार के चार सदस्य विधायक चुने गए थे. ओमप्रकाश चौटाला के छोटे भाई रणजीत सिंह एक निर्दलीय के रूप में चुनाव जीते थे, अजय सिंह की पत्नी नैना सिंह और बेटे दुष्यंत चौटाला जेजेपी से तथा अभय सिंह इनेलो के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीत कर विधानसभा पहुचे थे. वर्तमान सरकार में दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री हैं और उनके दादा रणजीत सिंह बिजली मंत्री.
जेजेपी ऐलनाबाद चुनाव में दूसरे स्थान पर आई थी और संभावना यही है कि बीजेपी ही उपचुनाव लड़ेगी तथा जेजेपी बीजेपी के उम्मेदवार का समर्थन करेगी. बीजेपी को ऐलनाबाद में एक नए और कर्मठ उम्मीदवार की तलाश है क्योंकि पवन बेनीवाल जो 2019 में बीजेपी के प्रत्याशी थे अब कांग्रेस पार्टी में शामिल हो चुके हैं. इस बात की प्रबल संभावना है कि बीजेपी अभय सिंह के खिलाफ उनके चचेरे भाई आदित्य चौटाला को मैदान में उतार सकती है. आदित्य चौटाला बीजेपी के सिरसा जिला अध्यक्ष हैं और देवीलाल के सबसे छोटे बेटे जगदीश सिंह के पुत्र हैं.
कांग्रेस पार्टी की तरफ से उम्मीदवार कैप्टन अमरदीप सिंह हो सकते हैं जो देवीलाल के भाई साहिब सिंह के पोते हैं. अमरदीप सिंह को हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा का करीबी माना जाता है. चूंकि अमरदीप सिंह ऐलनाबाद से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं और बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए पवन बेनीवाल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं, हुड्डा और शैलजा में जंग छिड़ी हुई हैं, संभव है कि अमरदीप सिंह को कांग्रेस पार्टी का टिकट मिल जाए. अगर ऐसा होता है तो तीन प्रमुख दलों के प्रत्याशी के तौर पर तीन भाई आपस में भिड़ते दिखेंगे जो ऐलनाबाद उपचुनाव को और भी रोचक बना देगा.
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