भारत सरकार के लिए विनिवेश का कामकाज देखने वाले विभाग दीपम (DIPAM) के सचिव ने ट्वीट कर कहा कि मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि एयर इंडिया के लिए फाइनेंशियल बोली को मंजूरी मिल गई है. यह गलत रिपोर्ट है. सरकार इस संबंध में जब फैसला लेगी, मीडिया को सही जानकारी शेयर की जाएगी. अभी तक इस संबंध में फैसला नहीं लिया गया है.
दरअसल, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि सरकार ने टाटा सन्स की बोली को एयर इंडिया के लिए मंजूरी दी है. सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया कि टाटा सन्स ने मिनिमम रिजर्व प्राइस के मुकाबले 3000 करोड़ रुपए ज्यादा की बोली लगाई थी.
मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार ने 30 सितंबर को एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर मिनिमम रिजर्व प्राइस तय किया था. उसके अगले ही दिन टाटा सन्स की बोली को मंजूरी का दावा किया जा रहा है. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के सूत्रों का दावा है कि दिसंबर 2021 तक इसके निजीकरण का काम पूरा हो जाएगा.
टाटा सन्स ने एयर इंडिया के लिए कितनी बोली लगाई है, इसको लेकर फिलहाल किसी तरह की जानकारी नहीं है. हालांकि, माना जा रहा है कि इस डील में एक ऐसे क्लाउज को शामिल किया जाएगा जिसके तहत बाद में किसी तरह की मांग जैसी समस्या पैदा नहीं हो. इस काम को पूरा करने के लिए टाटा ग्रुप के 200 से ज्यादा सीनियर एंप्लॉयी लगे हुए हैं. कई रिपोर्ट में ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि टाटा ग्रुप आने वाले दिनों में अपने सभी एयरलाइन बिजनेस को सिंगल एंटिटी में बदल देगी.
माना जा रहा है कि एयर इंडिया पर करीब 40 हजार करोड़ का कर्ज है. सरकार की योजना के मुताबिक, वह खरीदार को 23 हजार करोड़ का कर्ज ट्रांसफर करेगी.
सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया था कि वित्त वर्ष 2019-20 के प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक, एयर इंडिया पर कुल 38,366.39 करोड़ रुपए का कर्ज (Total Debt on Air India) है. एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड के स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) को एयरलाइन द्वारा 22,064 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के बाद की यह रकम है. सरकार ने संसद को बताया था कि अगर एयर इंडिया बिक नहीं पाती है तो उसे बंद करना है एकमात्र उपाय है.
31 मार्च 2020 तक एयर इंडिया की कुल फिक्स्ड प्रॉपर्टी करीब 45,863.27 करोड़ रुपये है. इसमें एयर इंडिया की जमीन, बिल्डिंग्स, एयरक्राफ्ट फ्लीट और इंजन शामिल हैं.
सरकार ने संसद में बताया में था कि गाइडेंस के आधार पर एयर इंडिया कर्मचारियों के हितों का पूरा खयाल रखा जाएगा. साथ ही, उन्हें भी पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा.
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