रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इंडियन ओवरसीज बैंक को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA Framework) से बाहर निकालने का फैसला किया है. रिजर्व बैंक की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, बोर्ड ऑफ फाइनेंशियल सुपरविजन ने इंडियन ओवरसीज बैंक के कामकाज को रिव्यू किया है. 31 मार्च 2021 को जारी रिजल्ट के मुताबिक, बैंक ने PCA पारामीटर का उल्लंघन नहीं किया है. ऐसे में इसे अब PCA फ्रेमवर्क से बाहर निकाला जाता है.
रिजर्व बैंक की तरफ से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि इंडियन ओवरसीज बैंक ने लिखित में कहा कि वह रेग्युलेटरी संबंधी सभी नियमों को ध्यान में रखेगी. रेग्युलेटरी कैपिटल, नेट एनपीए और लेवरेज रेशियो पर उसकी लगातार नजर रहेगी. इंडियन ओवरसीज बैंक ने रिजर्व बैंक को भरोसा दिया कि वह धीरे-धीरे स्ट्रक्चरल और सिस्टमैटिक बदलाव की दिशा में काम करेगा.
PCA फ्रेमवर्क से बाहर निकाले जाने के बाद अब बैंक खुलकर लोन बांट सकेगा और कारोबार कर सकेगा. अगर कोई बैंक रिजर्व बैंक के पीसीए फ्रेमवर्क के अंतर्गत रहता है तो उसपर लोन बांटने और कारोबार करने संबंधी कई तरह के अंकुश लगाए गए होते हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अक्टूबर 2015 में इंडियन ओवरसीज बैंक पर इसे लागू किया था.
इससे पहले रिजर्व बैंक ने यूको बैंक को PCA फ्रेमवर्क से बाहर निकाला था. यह फैसला इसी महीने के दूसरे सप्ताह में लिया गया था. बैंक के कामकाज समेत वित्तीय स्थिति में सुधार आने के बाद ये फैसला लिया गया था. RBI की ओर से जारी बयान में बताया गया था कि यूको बैंक के कामकाज की समीक्षा के बाद वित्तीय निगरानी बोर्ड ने बैंक के 2020- 21 के तिमाही नतीजों के आधार पर यह पाया कि बैंक पीसीए मानदंडों का उल्लंघन नहीं कर रहा है. इस फैसले के बाद बैंक अब नया कर्ज दे पाएगा. नई शाखाओं के खोलने पर लगी पाबंदी हट जाएगी. आपको बता दें कि इन सरकारी बैंकों को आरबीआई ने प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (PCA) के दायरे में ला दिया था. पीएसीए में शामिल बैंकों की हालत जब तक नहीं सुधरती, तब तक ये कोई बड़ा नया कर्ज नहीं दे सकते हैं.
इंडियन ओवरसीज बैंक के पीसीए से बाहर होने पर ग्राहकों पर कोई असर असर नहीं होगा. ये बैंक अपनी शाखाओं का विस्तार कर पाएगा. साथ ही, नई भर्तियां भी शुरू हो जाएंगी. लिहाजा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. किसी बैंक के पीसीए में रखे जाने पर उसके ग्राहकों को फिक्र करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि आरबीआई ने ‘बासेल मानकों’ के अनुरूप बैंकों की वित्तीय सेहत दुरुस्त रखने के लिए पीसीए फ्रेमवर्क बनाया है, ताकि बैंक अपनी पूंजी का सदुपयोग कर सकें और जोखिम का सामना करने को तैयार रहें.
आरबीआई को जब लगता है कि किसी बैंक के पास जोखिम का सामना करने को पर्याप्त पूंजी नहीं है, उधार दिए धन से आय नहीं हो रही और मुनाफा नहीं हो रहा है तो उस बैंक को ‘पीसीए’ में डाल देता है, ताकि उसकी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जा सकें. कोई बैंक कब इस स्थिति से गुजर रहा है, यह जानने को आरबीआई ने कुछ इंडिकेटर्स तय किए हैं, जिनमें उतार-चढ़ाव से इसका पता चलता है. जैसे सीआरएआर, नेट एनपीए और रिटर्न ऑन एसेट्स.
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