चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ महाराष्ट्र में (Gulab Cyclone in Maharashtra)जम कर कहर ढा रहा है. जितनी तबाही आंध्र प्रदेश और ओड़िशा में नज़र नहीं आई, उससे कहीं ज़्यादा ख़ौफ़नाक असर इसका मराठवाडा और विदर्भ (Marathwada & Vidarbh) में नज़र आ रहा है. मूसलाधार बरसात से आई बाढ़ (Heavy Rain & Flood in Maharashtra) से जान और माल की भयंकर हानि हुई है. राज्य के आपदा प्रबंधन, राहत और पुनर्वास मंत्री विजय वडेट्टीवार (Vijay Wadettiwar, Minister of Disaster Management, Relief and Rehabilitation) के मुताबिक अब तक 436 लोगों की जान चली गई है और 22 लाख हेक्टेयर की फसल तबाह हो गई है.
मंत्री विजय वडेट्टीवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर यह जानकारी दी कि जिन 436 लोगों की जान गई है, उनमें से 6 लोगों के शव अब तक नहीं मिल सके हैं. 136 लोग जख्मी हुए हैं. उस्मानाबाद, लातूर, औरंगाबाद और जलगांव में NDRF और स्थानीय पुलिस ने मिलकर 100 लोगों को बचाया है. एनडीआरएफ की 1 टीम उस्मानाबाद और 1 टीम लातूर में तैनात होकर हेलिकॉप्टर से इन दो जिलों में बचाव कार्य कर रही है. उस्मानाबाद में हेलिकॉप्टर से 16 और बोट की सहायता से 20 लोगों को बचाया गया. लातूर में हेलिकॉप्टर से 3 और बोट से 47 लोगों को बचाया गया. औरंगाबाद में 24 लोगों को वोट की सहायता से बचाया गया.
राहत और पुनर्वास मंत्री विजय वडेट्टीवार ने बताया कि बारिश और बाढ़ की वजह से 196 बड़े जानवर भी मर गए हैं. बिजली गिरने से छोटे-बड़े करीब 57 जानवरों की मौत हो गई है. अनगिनत घर उजड़ गए हैं. 22 लाख हेक्टेयर की खेती तबाह हो गई है. 17 लाख हेक्टेयर की जमीन खराब हो गई है. अब तक 81 प्रतिशत नुकसान का पंचनामा हो गया है. भारी बरसात के कायम होने की वजह से अभी भी 19 प्रतिशत नुकसान का पंचनामा नहीं हो पाया है. नुकसान से जुड़ी लगातार नई जानकारियां सामने आ रही हैं.
मंत्री वडेट्टीवार ने कहा कि 127 इलाके ऐसे हैं जहां चार बार बेहिसाब बारिश हुई है. कई इलाके ऐसे हैं जहां आठ बार भयंकर बारिश हुई है. कई जगह रास्ते बुरी तरह से ख़राब हो गए हैं, बिजली के खंभे गिर गए हैं. ज़मीनें धंस गई हैं. इन सबका पंचनामा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कई पानी के स्रोतों ने अपना रास्ता बदल लिया है. रास्ते और पुल बहने से सिंचाई विभाग को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है.
राहत और पुनर्वास मंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र की ओर से आपत्ति-विपत्ति की हालत में पर्याप्त मदद नहीं मिलती है. उन्होंने कहा कि 2020 में भी ओलावृष्टि ने ऐसी ही तबाही लाई थी. तब भी केंद्र से हमने मदद की अपील की थी. लेकिन केंद्र से टीम आई ही नहीं. प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान से निपटने के लिए केंद्र से 1 हजार 65 करोड़ रुपए की मांग की थी, उनमें से सिर्फ 268 करोड़ 59 लाख रुपए ही मिले.
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