महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के धान उत्पादन किसान इन दिनों परेशानी में घिरे हुए नज़र आ रहे हैं. क्योंकि इस समय धान में कई बीमारियों का असर दिखाई दे रहा रहा है. उसे लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है. लगातार बारिश होने के कारण, बदलते मौसम की वजह से फसलों को धूप नहीं मिल पाने से वो खराब होने लगी हैं. लगातार जलभराव से समस्या ज्यादा हो रही है. किसानों ने बीमारियों से फसल नुकसान का सर्वे कर सरकारी राहत की मांग की है.
धान की फसल पर करपा और गाद जैसी बीमारियों का फैलाव हो गया है. गाद बीमारी धान रोपाई में निकलने वाले नए पौधों को रोकती है. धान के पौधे दूर से हरे दिखाई देते हैं, लेकिन पास से देखने पर केवल हरे पौधे दिखाई देते हैं. जिसमें धान की बालियां नहीं लगतीं. इन बीमारियों के कीड़े, जीव जंतुओं के लिए वातावरण पोषक साबित हो रहा है,धान की फसल पर कीड़े आक्रमण कर रहे हैं.
इस समय धान में करपा (ब्लास्ट) रोग दिखाई पड़ रहा है. इसमें पत्तियों पर छोटे-छोटे धब्बे एवं किनारे पर गहरे भूरे या लालिमा लिए होते हैं. यह मिलकर सफेद रंग के बड़े धब्बे बना लेते हैं जिससे पौधा झुलस जाता है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यह नियंत्रण योग्य बीमारी है. किसान समय रहते दवाओं का उपयोग करें तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है. इस रोग के आने के बाद धान में ज्यादा वक्त पानी न रुकने दें. वैज्ञानिकों की सलाह पर दवा का इस्तेमाल करें.
इस वक्त धान की खेती (Paddy farming) करने वाले किसानों को फसल नष्ट करने वाले ब्राउन प्लांट हॉपर (Brown plant hopper) के आक्रमण का खतरा सता रहा है. यह कीट धान की पत्तियों से रस चूसकर फसल को भारी क्षति पहुंचाते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस कीट का सितंबर (September) से लेकर अक्टूबर (October) तक अधिक असर रहता है. इसका जीवन चक्र 20 से 25 दिन का होता है. इस कीट की वजह से धान की पत्तियों के ऊपरी सतह पर काले रंग की फफूंदी उग जाती है. जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया ठप हो जाती है. ऐसा होने से पौधे भोजन कम बनाते हैं और उनका विकास रुक जाता है.
कोई बीमारी न हो इसके लिए पहले ही दवाईयों का स्प्रे करके उसे रोक सकते हैं. लेकिन किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल दुकानदार के कहने पर न करें. किसी रोग के समाधान के लिए जो वैज्ञानिकों द्वारा तय दवाईयां हैं उनका स्प्रे करें. किसानों को इन दोनों बीमारियों से काफी नुकसान होकर उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत का घटा हो सकता हैं. किसानों ने मांग की है कि पटवारियों द्वारा इस बीमारी से नुकसान का खेतों में जाकर सर्वे कर प्रशासन को इसकी जानकारी देकर किसानों को राहत प्रदान की जाए.
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