Punjab New CM Political Challenges: पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) ने शपथ ले ली है. पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद से इस्तीफा देने के बाद काफी मंथन के बाद उनके नाम पर सभी सहमति बनी थी और उन्हें विधायक दल का नेता बनाया गया. अब चन्नी पंजाब के नए मुख्यमंत्री हैं. वे पहले दलित सिख (Dalit Sikh) हैं, जो प्रदेश की सबसे प्रमुख कुर्सी पर आसीन हुए हैं.
चरणजीत सिंह चन्नी गांधी परिवार (Gandhi Family) के भी करीबी रहे हैं और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के भी करीबी हैं, जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह के विरोधी रहे हैं. अपने राजनीतिक करियर में युवा कांग्रेस से जुड़े रहने के दौरान वे राहुल गांधी के करीब आए थे. इन सारी बातों के साथ ही जो सबसे अहम समीकरण उनके पक्ष में गया, वह है उनका दलित सिख होना. सुखजिंदर सिंह रंधावा भी सिद्धू के खेमे से हैं, कैप्टन के विरोधी और राहुल के करीबी हैं, लेकिन एक अहम समीकरण और सिद्धू के हस्तक्षेप के कारण वे मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए.
बहरहाल चरणजीत सिंह चन्नी अब केवल चमकौर साहिब से विधायक नहीं, बल्कि प्रदेश के मुखिया भी हैं और आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री के तौर पर उनके सामने कई चुनौतियां भी होंगी.
आने वाले फरवरी या मार्च में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. आज तारीख हो गई 20 सितंबर. यानी चुनाव में अब बामुश्किल 5 से साढ़े 5 महीने बचे हैं. ऐसे में प्रदेश की ज्यादा से ज्यादा जनता को अपने पक्ष में करना नए सीएम के सामने अहम चुनौती होगी. चन्नी के पक्ष में जो बात जाते दिख रही है, वह है उनका दलित सिख होना. पंजाब में इनकी आबादी सबसे ज्यादा (32 फीसदी) है. लेकिन चन्नी को अन्य समुदायों को भी कांग्रेस के समर्थन में करना होगा. कहा जा रहा है कि यह चुनाव प्रदेश प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. तो ऐसे में सिद्धू के खिलाफ अन्य गुट वाले नेताओं और उनके समर्थकों का समर्थन लेना चुनौती होगी.
पिछले कुछ महीनों से चल रहे क्लेश के बीच पंजाब कांग्रेस स्पष्ट रूप से दो धड़े में बंट गई है. कैप्टन अमरिंदर सिंह भले ही मुख्यमंत्री नहीं रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि वे बहुत शांत नहीं रहने वाले. नवजोत सिंह सिद्धू से कैप्टन का 36 का आंकड़ा है और चन्नी सिद्धू के खेमे से हैं. इन दो खेमों के अलावा प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो जैसे नेताओं के भी अपने-अपने खेमे हैं. ऐसे में नए सीएम के लिए सभी के बीच संतुलन बनाकर चलना एक बड़ी चुनौती होगी.
चरणजीत सिंह चन्नी का विवादों से भी पुराना नाता रहा है. 2018 में महिला आईएएस अधिकारी को मैसेज भेजने को लेकर उन्हें #MeToo पर विपक्षी घेरते रहे हैं. मई 2021 में जब इस पुराने मामले में पंजाब महिला आयोग ने तत्कालीन सरकार को नोटिस भेजा था, तो चन्नी फंसते नजर आ रहे थे. बहरहाल महिला अधिकारी पंजाब से बाहर पोस्टिंग ले चुकी हैं. कैप्टन सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री रहते चन्नी का टॉस उछालकर पॉलिटेक्निक लेक्चरर की पोस्टिंग करने का मामला भी उछला था. उनसे जुड़े कुछ और भी विवाद हैं, जिनसे ऊपर उठते हुए उन्हें आपने काम की बदौलत एक नई छवि गढ़नी होगी.
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