टाइटल (Title) एक लीगल टर्म है जिसका उपयोग किसी संपत्ति के सच्चे मालिक या मालिकों को पहचानने के लिए किया जाता है. एक घर के मालिक के सामने सबसे बड़ा जोखिम उसकी संपत्ति को देश की एक सक्षम अदालत द्वारा अवैध घोषित किया जाना है. इसे ध्यान में रखते हुए, बीमा नियामक, IRDAI ने जनरल इंश्योरेंस कंपनियों (हेल्थ बीमाकर्ताओं को छोड़कर) को इंडिविजुअल घर मालिकों और आवंटियों के लिए नया Title इंश्योरेंस प्रोडक्ट लॉन्च करने के लिए कहा है.
बीमा नियामक इरडा ने संपत्ति खरीदने वालों को गलत दस्तावेज से सुरक्षा देने के लिये कदम उठाया है. उसने साधारण बीमा कंपनियों से संशोधित प्रारूप में संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेज यानी टाइटल के जोखिम से बचाव के लिये यथाशीघ्र बीमा पॉलिसी पेश करने को कहा है.
Title बीमा क्षतिपूर्ति बीमा का एक रूप है. यह संपत्ति के संभावित मालिक को वास्तविक संपत्ति के Title में गड़बड़ियों के कारण वित्तीय नुकसान से बचाता है.
टाइटल इंश्योरेंस से कवर होगा नुकसान
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने गलत टाइटल के कारण नुकसान को लेकर कंपनियों (डेवलपर) के साथ-साथ व्यक्तियों की विधि के अनुसार देनदारी को ‘कवर’ करने के लिये Title इंश्योरेंस उत्पाद लाने के बारे में सुझाव देने को लेकर कार्यकारी समूह का गठन किया था.
समूह की सिफारिश के आधार पर इरडा ने साधारण बीमा कंपनियों से संपत्ति की खरीद दस्तावेज को लेकर बीमा पॉलिसी लाने को कहा है.
भारत में टाइटल इंश्योरेंस प्रारंभिक अवस्था में है. इस पर इरडा का सर्कुलर देश में इसकी स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद करेगा. वर्तमान में, यह उत्पाद केवल भारतीय बाजार में प्रमोटरों/डेवलपर्स के लिए उपलब्ध है, इस सर्कुलर में नियामक ने अलॉटी/इंडिविजुअल खरीदार के लिए एक खुदरा नीति पेश करने का सुझाव दिया है.
साइबर इंश्योरेंस को लेकर IRDAI ने जारी किए नया नियम
8 सितंबर को IRDAI की तरफ से जारी ताजा सर्कुलर के मुताबिक, इंडिविजुअल साइबर इंश्योरेंस में फंड चोरी, आइडेंटिटी चोरी, अन-ऑथराइज्ड ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, ईमेल स्पूफिंग जैसी घटनाओं को शामिल करना जरूरी कर दिया गया है.
नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी एजेंसी CERT-In (कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ऑफ इंडिया) के मुताबिक, कोरोना काल में इंडिविजुअल नेटवर्क पर ज्यादा साइबर अटैक हो रहे हैं. लोग घरों पर काम कर रहे हैं ऐसे में साइबर फ्रॉड पर्सनल कंप्यूटर और नेटवर्क को निशाना बना रहे हैं.
IRDAI के सर्कुलर के मुताबिक, इंडिविजुअल साइबर इंश्योरेंस के लिए कुछ नियम होंगे, जैसे फंड का चोरी होना, आइडेंटिटी का चोरी होना, सोशल मीडिया डेटा का चोरी होना, साइबर स्टॉकिंग/बुलिंग, मैलवेयर कवर, फिशिंग कवर, अन-ऑथराइज्ड ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, ईमेल स्पूफिंग, मीडिया लाएबिलिटी क्लेम, साइबर एक्सटॉर्शन, डेटा ब्रीचिंग और प्राइवेसी ब्रीचिंग को इसमें कवर करना जरूरी होगा.
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