जम्मू कश्मीर के शोपियां में शहीद हुए मेरठ के मेजर मयंक विश्नोई का रविवार को पूर्ण राजकीय एवं सैन्य सम्मान के साथ यहां अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनका पार्थिव शरीर रविवार को हिंडन वायुसेना स्टेशन से सड़क मार्ग से उनके पैतृक आवास कंकरखेड़ा के शिवलोकपुरी पहुंचा जहां से उनकी अंतिम यात्रा सूरजकुंड पहुंची. इसके बाद पूर्ण राजकीय और सैन्य सम्मान के बीच नम आंखों से शहीद मेजर को अंतिम विदाई दी गई.
सैन्य अधिकारी की पार्थिव देह को उनके पिता वीरेंद्र विश्नोई ने मुखाग्नि दी. इस दौरान शहीद की पत्नी स्वाति विश्नोई, मां आशा विश्नोई और बहनें अनु, तनु मौजूद रहीं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्विटर पर शोक व्यक्त किया और परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता व किसी एक परिजन को नौकरी देने की घोषणा की. उन्होंने जिले की एक सड़क का नामकरण भी शहीद मेजर मयंक विश्नोई के नाम पर करने की बात कही.
इससे पहले, शहीद के अंतिम दर्शन को उमड़े जनसैलाब के बीच शाम करीब पांच बजे अंतिम यात्रा शुरू हुई. इसमें प्रदेश सरकार की ओर से मंत्री कपिलदेव अग्रवाल और सांसद राजेंद्र अग्रवाल शामिल हुए.
मेजर मयंक का पार्थिव शरीर रविवार सुबह जम्मू-कश्मीर के उधमपुर से गाजियाबाद के हिंडन वायुसेना स्टेशन लाया गया. यहां से सेना के विशेष वाहन से इसे शाम करीब चार बजे मेरठ में कंकरखेड़ा के शिवलोकपुरी स्थित उनके पैतृक आवास लाया गया जहां सांसद राजेंद्र अग्रवाल सहित सेना, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.
मेजर मयंक (30 ) जम्मू कश्मीर के शोपियां में राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे. परिजनों के मुताबिक, आतंकियों से मुठभेड़ करते समय उनके सिर में गोली लगी थी. 27 अगस्त से उनका उधमपुर स्थित सैन्य अस्पताल में इलाज चल रहा था. शनिवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली.
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