अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने अपने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के साथ फोन पर बात की है. इस फोन कॉल के साथ ही दोनों नेताओं के बीच सात माह से जारी मौन व्रत भी टूट गया है. अमेरिका (US) और चीन (China) दोनों के अधिकारियों की तरफ से इसकी पुष्टि की गई है. गौरतलब है कि अमेरिका और चीन दो दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्तियां हैं और दोनों देशों के बीच पिछले करीब एक साल से तनाव की स्थिति है.
बाइडेन और जिनपिंग के बीच फोन कॉल की पुष्टि व्हाइट हाउस और चीन के सरकारी मीडिया की तरफ से की गई है. दोनों नेताओं के बीच शुक्रवार की सुबह वार्ता हुई है. बाइडेन और जिनपिंग के बीच यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई है जब चीन ने अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार को समर्थन किया है. चीन की तरफ से अफगानिस्तान के लिए 31 मिलियन डॉलर की मदद का ऐलान भी किया गया है.
बाइडेन और जिनपिंग के बीच यह फोन कॉल करीब 90 मिनट की थी. व्हाइट हाउस की मानें तो इस कॉल के जरिए अमेरिका और चीन के संबंधों पर ध्यान देने की कोशिश की गई है. दोनों नेताओं के बीच वार्ता में आपसी हितों वाले क्षेत्रों के अलावा आदर्श और भावी रिश्तों को लेकर भी चर्चा हुई है. जो बाइडेन ने इससे पहले इस साल जब जनवरी में सत्ता संभाली थी तो जिनपिंग के साथ फोन पर बात की थी. चीनी मीडिया की मानें तो दोनों नेताओं ने दूसरी बार फोन पर बात की है.
यह फोन कॉल ऐसे मौके पर हुई है जब दोनों देशों के बीच कोरोना वायरस महामारी को लेकर तनाव की स्थिति है. इसके साथ ही ट्रेड, मानवाधिकार और कई मुद्दों पर भी तनातनी बनी हुई है. चीनी मीडिया का कहना है कि दोनों पक्ष इस बात पर रजामंद हुए हैं कि वो आपसी संपर्क बरकरार रखेंगे. इस कॉल से पहले बाइडेन प्रशासन के एक सीनियर ऑफिसर ने कहा था कि व्हाइट हाउस चीन के साथ शुरुआती संपर्क को लेकर संतुष्ट नहीं है.
व्हाइट हाउस अधिकारी के मुताबिक बाइडेन ने जिनपिंग को स्पष्ट कर दिया है कि चीन पर मानवाधिकार के मुद्दों को लेकर दबाव डालने वाली नीति से पीछे हटने का उनके प्रशासन का कोई इरादा नहीं है. अमेरिका मानता है कि कुछ और क्षेत्र हैं जहां पर चीन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे से बाहर जाकर काम कर रहा है.
पिछले हफ्ते ही चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बाइडेन के क्लाइमेट चेंज पर बने खास दूत जॉन कैरी को चेतावनी दी थी कि अमेरिका-चीन के रिश्ते क्लाइमेट चेंज पर कोशिशों को प्रभावित कर रहे हैं. अफगानिस्तान में बदलते हालात के बीच जब चीन तालिबान के साथ खड़ा है ऐसे में ये बातचीत अहम हो जाती है. साथ ही गुरुवार को जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में भी शामिल हुए थे
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