गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं कि कब उनके बप्पा उनके घर आएंगे. वहीं दिल्ली में गणेश चतुर्थी मनाने पर रोक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट (High Court )में याचिका दायर की गई थी. इस याचिका पर कोर्ट ने नोटिस इशू करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने बिना होमवर्क किए अधूरी याचिका दायर की है. वकील एम.एल शर्मा ने ये याचिका दायर की थी. शर्मा ने कोर्ट की टिप्पणी के बाद, कोर्ट से दोबारा इस मामले में संशोधित याचिका दायर करने की इजाज़त के साथ अपनी याचिका वापस ले ली है.
वकील एम एल शर्मा ने अपनी याचिका में कहा था कि कोई भी राज्य कोई धार्मिक गतिविधि नहीं कर सकता और दिल्ली सरकार पिछले 15 दिनों से गणेश पूजा के विज्ञापन दें रही है. टीवी चैनलों पर ऐसे विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल ने शर्मा से पूछा कि रिट याचिका में आपकी क्या प्रार्थना है? वकील एम.एल शर्मा ने कहा कि ऐसे माहौल में राज्य द्वारा ऐसे उत्सव मनाना मनमाना है. ये आपराधिक विश्वासघात के बराबर है. कोर्ट ने कहा कि आपकी प्रार्थना क्या है? पेज पर आएं, कोई सही पेजिंग नहीं है. आप किस याचिका पर बहस कर रहे हैं? यहां पेजिंग अलग है.
कोर्ट ने वकील शर्मा से पूछा कि क्या उनके पास उन विज्ञापनों के स्क्रीनशॉट या तस्वीरें हैं जिनका वो उल्लेख कर रहे हैं, क्या कोई एनेक्चर हैं. इसके जवाब में याचिका वकील एम.एल शर्मा ने कहा कि नहीं ऐसा कुछ नहीं है.
कोर्ट ने शर्मा से कहा कि याचिका में किए गए दावों के मुताबिक आपने अपनी याचिका में विज्ञान से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं और आप कह रहे हैं ‘उत्सव, समारोह, विज्ञापन अवैध है’ कौन सा विज्ञापन? हमें पता ही नहीं है. विज्ञापन को देखे बिना हमें इसे अवैध घोषित कर देना चाहिए?. वहीं कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह याचिका बिना कोई होमवर्क किए दायर की गई है. अगर आप फाइल करना चाहते हैं तो आप एक नई याचिका दायर करें. इसमें हम नोटिस भी जारी नहीं करेंगे.
वकील एम.एल शर्मा ने कोर्ट से कहा कि वो इसके लिए माफी चाहतें, उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. नई पेटिशन दायर करेंगे, लेकिन क्या कोर्ट सरकार से ये पूछा सकता है कि वो गणेश चतुर्थी का उत्सव आयोजित करने जा रहे हैं या नहीं ?. जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका वकील एम.एल शर्मा की मांग को ठुकराते हुए उन्हें मौजूदा याचिका वापस लेने और कोर्ट के समक्ष नई याचिका दायर करने की इजाज़त दी
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