अफगानिस्तान में तालिबान के शासन को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे (तालिबान) लोगों के साथ इंसाफ करेंगे और एक अच्छी हुकूमत चलाएंगे. नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक और अपने पिता शेख अब्दुल्ला की 39वीं पुण्यतिथि के मौके पर श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही.
उन्होंने कहा कि “अफगानिस्तान एक अलग देश है. जो वहां हैं, उन्हें उसे संभालना है. उन्हें (तालिबान) पहले अपने देश में स्थिरता कायम करनी चाहिए और मुझे उम्मीद है वे सभी के साथ न्याय करेंगे और एक अच्छी हुकूमत चलाएंगे, जिसमें मानवाधिकारों की रक्षा करेंगे और इस्लामी उसूल पर चलाएंगे. मैं यह भी कहूंगा कि तालिबान को दूसरे देशों के साथ दोस्ताना संबंध बनाना चाहिए.”
तालिबान ने मंगलवार को अफगानिस्तान की कार्यवाहक सरकार के मंत्रिमंडल की घोषणा करते हुए मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है, जबकि मुल्ला अब्दुल गनी बरादर उप प्रधानमंत्री होंगे. मंत्रिमंडल में तालिबान की शीर्ष हस्तियों को शामिल किया गया है. इसमें वैश्विक स्तर पर आतंकी नामित किए गए हक्कानी नेटवर्क के नेता सिराजुद्दीन हक्कानी को गृह मंत्री का प्रभार सौंपा गया है. अमेरिका ने उसके बारे में सूचना पर 50 लाख डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है. नई सरकार की घोषणा पर भारत की ओर से कोई बयान नहीं आया है.
आर्टिकल 370 पर रुख कायम- अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला ने एक बार कहा कि अनुच्छेद-370 पर उनका रुख अब भी कायम है और वे राज्य का दर्जा वापस लेने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव को लेकर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि चुनाव कब होंगे, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस चुनाव से अलग नहीं रहेगा.
उन्होंने कहा कि हम चुनाव में हिस्सा लेगें और लड़ेंगे, लेकिन पहले केंद्र को राज्य का दर्जा वापस देना चाहिए. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि यहां चुनाव कब होंगे. जब भी चुनाव होंगे तो हम दूर जाने की बजाय इसमें हिस्सा लेंगे और जीतेंगे भी. चुनाव कराने से पहले केंद्र को राज्य का दर्जा वापस बहाल करना चाहिए.”
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