सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वो इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश से संबंधित मामले की सुनवाई करेगा, जिसमें अस्पताल से लापता हुए एक 82 वर्षीय व्यक्ति के मामले पर हाई कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लिया गया था. चीफ जस्टिस (CJI) एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से उन्हें संपर्क का नंबर देने के लिए कहा और साथ ही कहा कि वह मामले पर विचार करेगी.
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपनी अपील का जिक्र किया. राज्य सरकार की अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के खिलाफ गंभीर सख्ती की जा रही है और इसलिए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाई कि कोर्ट को इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए. इस पर CJI रमणा ने कहा कि हमें नंबर दीजिए, हम देखेंगे.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 18 अगस्त को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि टीबी सप्रू अस्पताल से तीन महीने से लापता कोरोना संक्रमित 82 वर्षीय वृद्ध राम लाल यादव को तलाश कर 27 अगस्त को पेश किया जाए. साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और गृह विभाग के प्रमुख सचिवों को लापरवाही बरतने वाले अस्पताल के अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.
कोर्ट ने राज्य सरकार को टीबी सप्रू अस्पताल की सुरक्षा और सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अस्पताल में उच्च सुरक्षा उपकरण लगाए जाएं, नियमित देखभाल की जाए और उनका ऑडिट कराया जाए. दोनों अधिकारियों को ऑडिट रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया गया और सप्रू अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था.
मई में अस्पताल से गायब हुए थे राम लाल
कौशांबी निवासी राम लाल यादव जूनियर इंजीनियर पद से रिटायर हो चुके हैं. उनकी उम्र करीब 82 वर्ष है. बेटे राहुल यादव उन्हें मई 2021 में टीबी सप्रू बेली अस्पताल में इलाज कराने के लिए ले गए थे. जांच में वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कर दिया गया था. दो दिन बाद राहुल को बताया गया कि राम लाल का ऑक्सीजन लेवल गिर गया है, जिस पर उन्हें ट्रामा में भर्ती करने की जानकारी दी गई मगर इसके बाद राम लाल गायब हो गए.
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि वह घर चले गए हैं, जबकि राहुल का तर्क था कि उनके पिता की उम्र ज्यादा है, वह ठीक से चल नहीं पा रहे हैं, ऐसी दशा में वह अस्पताल से कैसे जा सकते हैं. काफी खोजबीन के बाद भी जब कुछ पता नहीं चला तो राहुल ने कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन पुलिस उन्हें खोजने में नाकाम रही. तब बेटे ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था.
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