उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में नोएडा (Noida) के सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमरॉल्ड में अवैध रूप से बने दो टावर के मामले में जांच करने सोमवार को एसआईटी नोएडा में जांच शुरू करेगी. वहीं, जांच के लिए चार सदस्यीय टीम नोएडा पहुंचेगी. साथ ही एसआईटी नोएडा अथॉरिटी के ऑफिस में ही आकर जांच करेगी. एसआईटी के सवालों का जवाब देने और उनको पूरा रिकॉर्ड मुहैया कराने के लिए प्राधिकरण ने तैयारी कर ली है. मुख्य तौर पर नक्शा में बार-बार कैसे परिवर्तन किया गया और उस बदलाव को किसने मंजूरी दी इन सभी बिंदुओं पर एसआईटी जांच करेगी.
दरअसल, सीएम योगी ने 2 सितंबर को एसआईटी गठित करने का फैसला लिया था. इसके बाद शासन की ओर से एसआईटी का गठन किया गया था. इस समिति का अध्यक्ष औद्योगिक विकास आयुक्त एवं नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन संजीव मित्तल को बनाया गया है, जबकि सदस्य के रूप में ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक अनूप कुमार श्रीवास्तव और मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक राजीव सब्बरवाल को सदस्य बनाया गया है. वहीं, एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर ही दोषी पाए अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी. हालांकि अभी तक इस मामले में एक अधिकारी को निलंबित किया जा चुका है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नोएडा विकास प्राधिकरण की दोनों एसीईओ की कमिटी ने सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट मामले में तीन बिंदुओं पर जांच की है. साल 2009 में नक्शे में हुआ बदलाव, दूसरे बिंदु के रूप में 2012 में मानचित्र में हुआ बदलाव और तीसरा इस परियोजना से जुड़ी जानकारी RTI के जरिए न देने की जांच हुई. इस मामले में एसआईटी के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि टीम इन बिंदुओं के साथ-साथ कुछ और भी तथ्यों की जांच करेगी. चूंकि नक्शे में जब बदलाव किए गए उन्हें किसने मंजूरी दी. नक्शा पाश होने में बदलाव के लिए किन-किन अधिकारियों की अहम भूमिका रही.
SIT की मुख्य रूप से जांच नक्शे में हुए बदलाव पर केन्द्रित रहेगी. इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि आखिर किसके कहने पर नक्शे में बदलाव किया गया और किसने इसको मंजूरी दी. मीडिया खबरों के अनुसार साल 2009 और साल 2012 में जब सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट से संबंधित परियोजना के नक्शे में बदलाव किया गया, उस समय इन पर फैसला लेने के लिए एक समिति बनाई गई थी. इस समिति में अथॉरिटी की प्लानिंग डिवीजन के साथ-साथ, ग्रुप हाउसिंग और सिविल विभाग के अधिकारी भी शामिल होते थे. फिलहाल SIT अब ये जांच करेगी कि इस पूरे मामले में इन विभाग के अधिकारियों के अलावा क्या किसी सीनियर अधिकारी की भी भूमिका रही थी.
बता दें कि सुपरटेक एमरॉल्ड में अवैध रूप से बने दोनों टावरों को गिराने का आदेश 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था. इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए केस चलाने के आदेश दिए गए थे. इससे पहले साल 2014 में इलाहाबाद हाइ कोर्ट इन टावरों को गिराने का आदेश दे चुका है. वहीं, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण की सीईओ ने दोनों एसीईओ की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर जांच-पड़ताल शुरू कर दी थी.
subscribe to rss
811,6 followers
6958,56 fans
6954,55 subscribers
896,7 subscribers
6321,56 followers
9625.56 followers
741,9 followers
3548,7 followers