कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने केंद्र सरकार पर ट्वीट कर निशाना साधा. प्रियंका ने कहा कि बीजेपी सरकार रसोई गैस की कीमत हर महीने बढ़ा रही है. पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) के दाम तो 3-4 महीने में 60-70 बार बढ़ जाते हैं लेकिन, किसान के गन्ने का रेट 3 साल से नहीं बढ़ा? उन्होंने इससे पहले भी कई बार सरकार से किसानों से गन्ने की खरीद का मूल्य बढ़ाने की अपील की है.
कांग्रेस नेता ने पिछले हफ्ते भी यह मुद्दा उठाया था और कहा था कि किसानों के लिए डीजल और बिजली की कीमतों में नियमित बढ़ोत्तरी के बावजूद गन्ने की कीमत में पिछले तीन सालों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक ट्वीट में कहा, ”प्रधानमंत्री जी, आपके राज में दो ही तरह का ‘विकास’ हो रहा है: एक तरफ आपके खरबपति मित्रों की आय बढ़ती जा रही है. दूसरी तरफ आमजनों के लिए आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ते जा रहे हैं.” उन्होंने कहा, ”अगर यही ‘विकास’ है तो इस ‘विकास’ को अवकाश (छुट्टी) पर भेजने का वक्त आ गया है.”
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को मौजूदा पेराई सत्र में भी गन्ने का वही भाव मिल रहा है जो लगातार पिछले तीन साल से मिलता रहा है. देश के सबसे अधिक गन्ना पैदा करने वाले राज्य में फिलहाल इसकी कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की गई है. विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाता रहा है लेकिन, सरकार ने अभी तक इसे लेकर कोई फैसला नहीं किया है.
उत्तर प्रदेश में करीब 48 लाख किसान गन्ने की खेती (Sugarcane cultivation) में लगे हुए हैं. विधानसभा चुनाव नजदीक है. ऐसे में गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं किए जाने का सियासी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. क्योंकि गन्ने पर यूपी की सियासत गरमा रही है. किसान नेता राकेश टिकैत इस मसले को जोरशोर से उठा रहे हैं. ऐसे में यह अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि 2022 तक किसान आंदोलन के एजेंडे में यूपी के गन्ना किसानों का सवाल अहम होगा. देखना यह है कि सत्ताधारी पार्टी इस मसले का क्या काट लेकर आती है.
पश्चिम यूपी के किसान नेता इसके लिए बहुजन समाज पार्टी की सरकार को याद करते हैं. जब पांच साल में रिकॉर्ड 115 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई थी. साल 2007 में जब मायावती ने सरकार संभाली तब गन्ने का दाम 125 रुपये प्रति क्विंटल था. जिसे उन्होंने पांच साल में बढ़ाकर 240 रुपये पर पहुंचाया. इसके बाद अखिलेश सरकार ने अपने पांच साल में 65 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की. दाम के मसले पर हमने गन्ना मंत्री सुरेश राणा से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी
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