पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के असम दौरे की संभावना पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार को कहा कि वो तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के लिए रेड कार्पेट पर स्वागत करेंगे. साथ ही कहा कि उनके दौरे से बीजेपी को चुनाव में और अधिक मदद मिलेगी और वोट कांग्रेस और टीएमसी के बीच बंट जाएंगे. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि जितना अधिक वो असम और त्रिपुरा का दौरा करेंगी, उतना ही हमें (बीजेपी) को फायदा होगा. अगर वो असम और त्रिपुरा का दौरा करती हैं तो ये हमारे लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि वोट कांग्रेस और टीएमसी के बीच विभाजित होगा.
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं रेड कार्पेट बिछाकर उनका स्वागत करूंगा. मुख्यमंत्री सरमा रविवार को असम जातीय परिषद (एजेपी) के पूर्व विधायक आलोक कुमार घोष को लेक टाउन स्थित उनके आवास पर अंतिम संस्कार करने के लिए सिलीगुड़ी पहुंचे थे. मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि ममता बनर्जी का असम में हमेशा स्वागत है. वो देवी खमाखा की पूजा करने के लिए कभी भी आ सकती हैं. पूजा करने के अलावा, असम में उनका कोई लेना-देना नहीं है, वो फिर से पश्चिम बंगाल जाएंगी. उन्होंने ममता बनर्जी से त्रिपुरा का दौरा करने का भी अनुरोध किया, क्योंकि वोट बंट जाएंगे और बीजेपी इसका फायदा उठा सकती है.
गोरखा समुदाय के खिलाफ सभी मामले हटाए जाएंगे- हिमंत बिस्व सरमा
कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देव के टीएमसी में शामिल होने पर मुख्मंत्री सरमा ने कहा कि सुष्मिता देव असम के एक विशेष जिले से संबंधित हैं, न कि पूरे राज्य से. मुख्यमंत्री ने कहा कि जितना अधिक वो टीएमसी के लिए प्रचार करेंगी, उतने ही अधिक वोट टीएमसी और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच विभाजित होंगे. सरमा ने आगे आश्वासन दिया कि गोरखा समुदाय के खिलाफ सभी मामले छोड़ दिए जाएंगे और उनके खिलाफ कोई मामला नहीं होगा. हमने उन्हें आदिवासी बेल्ट में भी संरक्षित वर्ग का दर्जा दिया है.
सरमा ने ये भी कहा कि उन्हें लगता है कि डिटेंशन कैंप में करीब 12 बंगाली हिंदू लोग हैं. उन्हें भी रिहा करने की प्रक्रिया चल रही है. अगले 2-3 महीनों में हालात बिल्कुल सामान्य हो जाएंगे. पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बोलते हुए असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव एक ही समय में हुए, लेकिन असम में किसी भी घर पर पथराव नहीं किया गया.
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