झारखंड हाई कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि वह धनबाद के न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत के मामले से जुड़े दोनों मुख्य आरोपियों आटो चालक लखन वर्मा एवं राहुल वर्मा को पर्याप्त सुरक्षा दे क्योंकि ये दोनों इस मामले की अहम कड़ी हैं. इसके साथ ही अदालत ने दोनों आरोपियों को झारखंड से बाहर हवाई मार्ग से ही ले जाने का सुझाव दिया जिससे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
धनबाद के न्यायाधीश उत्तम आनंद की 28 जुलाई को आटो से हुई टक्कर के कारण संदिग्ध मौत के मामले की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपियों को नारको टेस्ट के लिए ट्रेन से ले जाया गया है. इस पर मुख्य न्यायाधीश की खंड पीठ ने कहा कि आरोपियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए क्योंकि ये दोनों इस मामले की अहम कड़ी हैं.
दालत ने अंदेशा जताते हुए सीबीआई को सुझाव दिया कि अगर इस मामले में कोई बड़ा षडयंत्र हुआ है तो इन आरोपियों पर हमला किया जा सकता है. उसने कहा, ‘‘अगर इनकी हत्या हो गई तो हम सबकुछ खो देंगे. आरोपियों को ट्रेन के बजाय हवाई जहाज से बाहर ले जाया जाए. हवाई जहाज ट्रेन की अपेक्षा बहुत सुरक्षित है. इतना ही नहीं हवाई अड्डे ले जाने और वहां से लाने के दौरान उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए.’’ पीठ ने कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है. यह मामला उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में है और उसके आदेश पर ही उच्च न्यायालय मामले की निगरानी कर रहा है.
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन व एसएन प्रसाद की खंडपीठ में धनबाद के जज उत्तम आनंद हत्याकांड मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई. इस दौरान सीबीआई की ओर से जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई. इसका अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि जांच में यह बात सामने आई है कि ऑटो के धक्के से ही न्यायाधीश की मौत हुई है. लेकिन जांच में हत्या की मंशा और षडयंत्र की जानकारी नहीं दी गई है. खंड पीठ ने जांच अधिकारी से पूछा कि घटना के दौरान वहां से गुजरे बाइक सवार की पहचान की गई है या नहीं. उसने कहा कि जल्द ही षडयंत्र का पता नहीं लगाया गया तो बाद में कठिनाई होगी. जांच रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. बाकी किसी को हिरासत में भी नहीं लिया गया है.
अदालत ने अगली सुनवाई पर प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया. मामले में अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी. ज्ञातव्य है कि धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध मौत 28 जुलाई को ऑटो की टक्कर से हो गई थी. यह घटना तब हुई जब वह सुबह की सैर के लिए निकले थे.
इस मौत को संदेहास्पद मानते हुए धनबाद के प्रधान जिला न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था. इस पत्र पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. दूसरी ओर उच्चतम न्यायालय ने भी इस पर संज्ञान लिया और झारखंड उच्च न्यायालय को इसकी निगरानी करने का निर्देश दिया.
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