कृषि वैज्ञानिक डॉ सिंह ने बताया कि इन सभी किस्मों के अलावा एक सबसे नवीनत किस्म हमने तैयार की है, जिसका नाम है पूसा सरसों- 28. यह 105-110 दिन में पक जाती है और 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार हासिल होती है. डॉ नवीन सिंह ने बताया कि इन सभी किस्मों की 15 सितंबर के आस पास बुवाई की जा सकती है और जनवरी के पहले हफ्ते तक इनकी कटाई हो जाती है.
कम अवधि में पकने वाली अगेती फसलों के लाभ के बारे में बताते हुए डॉ सिंह ने कहा कि सरसों की पैदावार माहू या चेपा कीट के प्रकोप से बच जाती है. इसके अलावा, ये फसलें बीमारी रहित भी हैं. इसके अलावा इन किस्मों की बुवाई कर किसान अपने खेत में तीन फसल एक साल में ले सकते हैं.
डॉ नवीन सिंह कहते हैं कि इस तरह के खेत सितंबर से लेकर जनवरी तक खाली रहते हैं. ऐसे में किसान भाई कम समय में पककर तैयार हो जानी वाली भारतीय सरसों की अच्छी प्रजाति लगाकर मुनाफा कमा सकते हैं. डॉ सिंह बताते हैं कि पूसा ने कुछ किस्मों को विकसित किया है, जो जल्द पककर तैयार हो जाती हैं और उत्पादन भी अधिक मिलता है.
उन्होंने बताया कि किसान भाई पूसा अग्रणी किस्म की खेती कर सकते हैं. यह 110 दिन में पक कर तैयार हो जाती है और एक हेक्टेयर में 13.5 क्विंटल पैदावार मिलती है. इसके अलावा, पूसा तारक और पूसा महक किस्मों की अगेती खेती हो सकती है. ये दोनों किस्में करीब 110-115 दिन के बीच पक जाती हैं और प्रति हेक्टेयर औसतन 15-20 क्विंटल पैदावार हासिल होती है.
डॉ सिहं ने एक और किस्म के बारे में जानकारी दी, जो सबसे कम समय में पककर तैयार हो जाती है. डॉ सिंह ने बताया कि पूसा सरसों- 25 नाम की किस्म 100 दिन में तैयार हो जाती है. एक हेक्टेयर में पूसा सरसों- 25 की बुवाई कर 14.5 क्विंटल पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा एक और किस्म है, पूसा सरसों- 27. इसे पकने में 110-115 दिन का समय लगता है और प्रति हेक्टेयर 15.5 क्विंटल तक पैदावार मिल जाती है.
सरसों की खेती कर किसान अब अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इस बार रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद सरसों के दाम उच्च स्तर पर बने रहे. अभी भी यह तिलहनी फसल अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 4650 रुपए प्रति क्विंटल से 3000 रुपए अधिक की कीमत पर बिक रही है. इस बार मिले अच्छे दामों से प्रोत्साहित किसान आगामी सीजन में सरसों की ज्यादा से ज्यादा खेती करने की योजना बना रहे हैं. इसी वजह से सरकार को भी उम्मीद है कि सरसों की पैदावार डबल हो सकती है.
खरीफ फसलों की खेती नहीं करने वाले किसानों ने अभी से सरसों की अगेती खेती की तैयारी में जुट गए हैं. कुछ किसानों ने खेत को सिर्फ सरसों बोने के लिए ही खाली रख लिया है. दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुवांशिकी संस्थान के कृषि विशेषज्ञ डॉ नवीन सिंह कहते हैं कि जिन्हें फरवरी माह में गन्ना, अगेती सब्जियां और जनवरी में प्याज व लहसून की खेती करना चाहते हैं, ऐसे किसान अपनी खेतों को खाली रखते हैं. उनके लिए सरसों की अगेती खेती काफी लाभदायक हो सकती है और वे अतिरिक्त मुनाफा हासिल कर सकते हैं.
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