मंगलवार की सुबह हॉकी प्रेमियों के लिए मायूस करने वाली थी. बेल्जियम ने मेंस हॉकी टीम के फाइनल में पहुंचने के सपने को तोड़ दिया. भारतीय टीम अब ब्रांज मेडल के लिए 5 अगस्त को मैदान में उतरेगी. बड़ी खबर ये भी है कि बुधवार को भारतीय महिला हॉकी टीम अर्जेन्टीना के खिलाफ सेमीफाइनल में उतरेगी.आखिरी क्वार्टर में बेल्जियम के खिलाड़ियों ने कुछ इस कदर तेज धावा बोला कि भारतीय रक्षा पंक्ति बिखर गई. एक के बाद एक हुए हमले और पेनल्टी कॉर्नर का ही नतीजा था कि फाइनल में जगह बनाने का सपना टूट गया. पेनल्टी कॉर्नर स्पेशलिस्ट एलेक्जेंडर रॉबी ने इस अहम मुकाबले में हैट्रिक लगाई. इससे पहले तीसरे क्वार्टर तक दोनों टीम 2-2 की बराबरी पर चल रही थीं.इस बात की उम्मीद थी कि 1980 के बाद भारतीय टीम पहली बार गोल्ड मेडल चूमने के लिए कदम आगे बढ़ाएगी. पर ऐसा हुआ नहीं. भारत को 5-2 से हार का सामना करना पड़ा. इसमें कोई दोराय नहीं कि हार हार होती है. लेकिन हार की वजहों को भी समझना चाहिए. भारतीय टीम सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर एक बेल्जियम से टकरा रही थी. रिकॉर्ड बुक में दोनों टीमों का अंतर साफ समझा जा सकता है. बावजूद इसके भारतीय टीम ने मुकाबले में कड़ा संघर्ष किया. हालांकि वो बेल्जियम को लगातार दूसरे ओलंपिक में फाइनल में जाने से नहीं रोक पाए.इस मायूसी के बाद अब हर कोई महिला हॉकी टीम की तरफ निगाहें गड़ाए बैठा है. महिला हॉकी टीम के हालात भी वैसे ही हैं. विश्व हॉकी की रैंकिंग में वो भले ही काफी नीचे है लेकिन उसने भी अपने जोश और जब्बे के दम पर सेमीफाइनल तक का सफर तय किया है. ओलंपिक के इतिहास में उसके पास पहली बार पोडियम फिनिश का मौका है.उसका मुकाबला वर्ल्ड नंबर दो अर्जेन्टीना की टीम से है. ये मुकाबला बुधवार को दोपहर 3.30 पर होगा. 2016 ओलंपिक के बाद इस बार भी अब तक मेडल टैली में भारत का नाम देश की लड़कियों ने ही दर्ज कराया है. पिछले मैच में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को जिस तरह से हराया उससे उम्मीदें भी बढ़ी हैं. करोड़ों खेल प्रेमियों की दुआएं देश की बेटियों के साथ हैं. चक दे इंडिया.
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