श्रावण का महीना शुरू होते ही शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की भक्ति में झूमने लगता है. इस पावन मास में पूरे उत्तर भारत और अन्य राज्यों से कांवड़िये भगवान शिव के पवित्र धाम जाते है और वहां से गंगाजल लाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं. हालांकि, इस बार कोरोनावायरस महामारी की वजह से देश के कई राज्यों में कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी गई है.कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों को सैकड़ों किलोमीटर दूर तक नंगे पैर ही चलना होता है. यात्रा के दौरान भगवान शिव की कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता. इस प्रकार शिव भक्त अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए गंगा जल लाते हैं और उससे भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर पहला कांवड़िया कौन था जिसने सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनकी कृपा प्राप्त की और उसके बाद से ही इस परंपरा की शुरुआत हुई. पहले कांवड़िये का नाम जानने के लिए आपको ये दिलचस्प कथा जरूर सुननी चाहिए.कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों को सैकड़ों किलोमीटर दूर तक नंगे पैर ही चलना होता है. यात्रा के दौरान भगवान शिव की कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता. इस प्रकार शिव भक्त अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए गंगा जल लाते हैं और उससे भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर पहला कांवड़िया कौन था जिसने सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनकी कृपा प्राप्त की और उसके बाद से ही इस परंपरा की शुरुआत हुई. पहले कांवड़िये का नाम जानने के लिए आपको ये दिलचस्प कथा जरूर सुननी चाहिए.एक बार सहस्त्रबाहु, ऋषि जमदग्नि के यहां पहुंचे थे. ऋषि जमदग्नि ने उनकी सेवा और आदर में जबरदस्त व्यवस्था की थी. ऋषि ने सहस्त्रबाहु की सेवा में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आने दी. सहस्त्रबाहु भी ऋषि के आदर-सत्कार से बहुत प्रसन्न हुआ परन्तु उसे यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि आखिर एक साधारण एवं गरीब ऋषि उसके और उसकी सेना के लिए इतना सारा खाना कैसे जुटा पाया और वह इसका उत्तर जानने के लिए उतावला हो गया. उसने अपने सवाल का उत्तर जानने के लिए अपने सैनिकों को काम पर लगा दिया.सहस्त्रबाहु के आदेश पर सैनिकों ने आखिरकार उसके सवाल का जवाब ढूंढ ही लिया. सैनिकों ने सहस्त्रबाहु को बताया कि ऋषि जमदग्नि के पास एक कामधेनु नाम की दिव्य गाय है. जिससे कुछ भी मांगो, वह सब कुछ प्रदान करती है. जब राजा को यह ज्ञात हुआ कि इसी कामधेनु गाय के कारण ऋषि जमदग्नि संसाधन जुटाने में कामयाब हो पाया तो उस गाय को प्राप्त करने के लिए सहस्त्रबाहु के मन में लालच उत्पन्न हो गया. उसने ऋषि से कामधेनु गाय मांगी परंतु ऋषि जमदग्नि ने कामधेनु गाय देने से मना कर दिया. इस पर सहस्त्रबाहु अत्यंत क्रोधित हुआ. सहस्त्रबाहु ने कामधेनु गाय प्राप्त करने के लिए ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी.
subscribe to rss
811,6 followers
6958,56 fans
6954,55 subscribers
896,7 subscribers
6321,56 followers
9625.56 followers
741,9 followers
3548,7 followers