प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के जोखिम से बचने के लिए हर साल औसतन 5.5 करोड़ किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल हो रहे हैं. लेकिन बीमा कंपनियों की मनमानी की वजह से प्रीमियम भरने के बाद भी हजारों किसान क्लेम के लिए भटक रहे हैं. इस समय किसानों के 2288.6 करोड़ रुपये के क्लेम किसी न किसी वजह से पेंडिंग हैं. इतनी रकम का बकाया दावा 2017-18, 2018-19 और 2019-20 का है.राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन के अध्यक्ष बिनोद आनंद का कहना है कि किसानों के फसल नुकसान के बावजूद क्लेम रोकने वाली कंपनियों पर सरकार सख्त कार्रवाई करे. इस स्कीम में स्ट्रक्चरल बदलाव करने की जरूरत है, ताकि किसानों को असानी से क्लेम मिल सके. तीन-तीन साल पुराना क्लेम भी नहीं मिलेगा तो कैसे काम चलेगा. किसान तभी बीमा क्लेम करता है जब उसकी फसल खराब होती है, लेकिन कंपनियां शर्तों की दुहाई देकर उनका पैसा रोक लेती हैं. ऐसी किसान विरोधी शर्तों को पीएम फसल बीमा योजना से बाहर कर देना चाहिए.
-2018-19: झारखंड के किसानों (farmers) का 663.8 करोड़ रुपये. -तेलंगाना के लोगों का 438.4 करोड़ रुपये का क्लेम बाकी है. -कर्नाटक के किसानों का 59.4 करोड़ रुपये का क्लेम अब तक नहीं मिला है. -2019-20: तेलंगाना के किसानों का सबसे अधिक 402.3 करोड़ रुपये का क्लेम बाकी है. -गुजरात के अन्नदाताओं का 243.2 करोड़ रुपये का क्लेम नहीं मिला है. -कर्नाटक के 149 और मध्य प्रदेश के किसानों का 95.5 करोड़ रुपये का क्लेम बाकी है. -उत्तर प्रदेश के किसानों का 24 करोड़ रुपये का क्लेम नहीं मिला है.
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