ममता बनर्जी के अंदर प्रधानमंत्री बनने का यह सपना अभी नहीं आया है, बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही उन्होंने घोषणा कर दिया था कि अब उनकी नजर दिल्ली की गद्दी पर है. ममता बनर्जी ने अपना सपना पूरा करने के लिए अपने सबसे खास चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लगाया हुआ है. प्रशांत किशोर तमाम विपक्षी नेताओं से मिलकर गैर बीजेपी दलों का एक ऐसा गठबंधन तैयार कर रहे हैं जिसकी नेता ममता बनर्जी हों. हालांकि उनके सामने शरद पवार और सोनिया गांधी जैसे नेता हैं जो शायद ऐसा नहीं चाहते हैं. इस वक़्त देश की राजनीतिक स्थिति जैसी है उसे देख कर यही लग रहा है कि शायद बहुत से दल ममता बनर्जी के नाम पर तैयार हो जाएं.
बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को करारी शिकस्त देने के बाद ममता बनर्जी अब दिल्ली की गद्दी पर पूरी नजर बनाए हुए हैं, उन्हें मालूम है कि यही सही वक्त है जब वह बंगाल की सियासत से निकलकर दिल्ली की सियासत में अपने पांव जमा सकती हैं, क्योंकि फिलहाल विपक्ष के पास कोई ऐसा बड़ा चेहरा नहीं है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के आगे टिक सके. ममता बनर्जी ने बंगाल में मोदी ब्रांड को करारी शिकस्त देकर यह साबित भी कर दिया है कि इस वक्त मोदी ब्रांड से टक्कर लेने की क्षमता है तो वह केवल उन्हें में है. 2024 की रणनीति बनाने के लिए ममता बनर्जी जल्द ही दिल्ली आएंगी और यहां विपक्ष के कई बड़े नेताओं जिनमें सोनिया गांधी, शरद पवार जैसे लोग शामिल हैं उनसे मुलाकात करेंगी. 21 जुलाई को शहीद दिवस के मौके पर भी विपक्ष के कई बड़े नेताओं को इकट्ठा कर ममता बनर्जी ने यह संदेश दिया था कि वह मोदी से भिड़ने के लिए विपक्ष की ओर से तैयार हैं.
21 जुलाई को ममता बनर्जी ने हर साल की तरह बंगाल से शहीद दिवस का आगाज़ किया. हालांकि इस बार उनके साथ दिल्ली से कई बड़े विपक्ष के नेता जुड़े थे. कांग्रेस से पी. चिदंबरम और दिग्विजय सिंह, डीएमके से तिरुचि शिवा, एनसीपी से शरद पवार और सुप्रिया सुले, आरजेडी से मनोज झा और तमाम विपक्ष के नेता जुड़े थे. ममता बनर्जी ने इस मौके पर कहा था, ‘देश को बचाने के लिए हमें एक जुट होना होगा वर्ना इस देश के लोग हमें कभी माफ नहीं करेंगे.’
ममता बनर्जी दिल्ली की सियासत को लेकर कितनी उत्सुक हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि दीदी इस वक्त केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के हर फैसले का खुला विरोध करती हैं. अभी हाल ही में पेगासस वाला मुद्दा जब आया उस पर भी ममता बनर्जी ने अपने मोबाइल के कैमरे पर टेप लगाकर केंद्र सरकार पर हमला बोला. इसके बाद 22 जुलाई को दैनिक भास्कर समूह पर आयकर विभाग की छापेमारी हुई तो उस पर भी ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि मीडिया घरानों पर हमला करके यह लोकतंत्र को कुचलने का एक और प्रयास किया जा रहा है. ममता बनर्जी के इस तरह के कई बयान है जो वह हर मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए देती हैं. जबकि पहले ऐसा नहीं देखा जाता था. पहले ममता बनर्जी उन्हीं मुद्दों पर हमलावर होती थीं जो बंगाल से जुड़े होते थे. लेकिन अब मुद्दा कहीं का भी हो ममता बनर्जी उसे हाथों-हाथ लेती हैं और बीजेपी पर हमला बोलने का एक भी अवसर नहीं छोड़ती हैं. जैसे वह देश की तमाम राजनीतिक पार्टियों को यह दिखाना चाहती हों कि वह पूरी तरीके से बीजेपी के विरोध में खड़ी हैं और देश की राजनीति करने को तैयार हैं.
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