पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एमएलसी के नामों के साथ ही अन्य कई मुद्दों पर सोमवार 19 जुलाई को दिल्ली में बीजेपी राष्ट्रीय जेपी नड्डा के साथ प्रदेश के प्रमुख पदाधिकारी बातचीत के लिए बैठेंगे. पांच जुलाई को रिक्त हुई विधान परिषद की चार सीटों की घोषणा बीजेपी अगले दो-तीन दिन में कर सकती है. बताया जाता है कि हाल ही में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए ब्राम्हण समाज के नेता और निषाद समाज से एमएलसी बनाया जा सकता है. पार्टी सूत्रों के अनुसार अगर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो फिर पर उसमें भी इन दोनों को जगह मिलने की संभावना है. तीसरी सीट राजभर समाज के किसी नेता को दी जा सकती है. इस रेस में हाल ही में बसपा से बाहर किए गए पूर्वांचल के एक कद्दावर नेता की भी चर्चा है. वहीं कायस्थ समाज से तीन नेता भी रेस में हैं.
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, चौथी सीट कायस्थ समाज को दिए जाने की चर्चा है. कायस्थ समाज से इसके लिए तीन नामों की चर्चाएं हैं. महज दो-तीन साल पहले विभिन्न दलों से होते हुए बीजेपी में आए एक नेता का नाम तेजी से चर्चा में है. वहीं दो अन्य नेताओं के नाम चर्चा में हैं जो पार्टी संगठन से जुड़े हैं.
प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election-2022) के लिए बीजेपी (BJP) अब अपने वोट बैंक के समीकरणों को साधने में जुट गई है. उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य की चार सीट खाली हैं, इसको लेकर बीजेपी ने आगामी चुनाव को मद्देनजर गुणा-भाग करना शुरू कर दिया है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, राज्य में विधान परिषद सदस्य की खाली चार सीटों पर मनोनयन से बीजेपी विधानसभा चुनाव-2022 की अपनी मुहिम को धार देगी.
बीजेपी इन चार सीटों निषाद, राजभर, कायस्थ और ब्राम्हण जाति को साधने की कोशिश करेगी. इन चारों जातियों के एक बड़े वर्ग को बीजेपी से नाराज माना जा रहा है.निषाद, राजभर, कायस्थ और ब्राम्हण जाति के नेताओं को एमएलसी बनाकर बीजेपी इस वर्ग को सकारात्मक संदेश दे सकती है.
उधर, बसपा की नजर भी ब्राह्मण समाज पर टेढ़ी हो गई है. ब्राह्मण वोट को पाने के लिए बसपा ने 23 जुलाई से हम अभियान की शुरुआत करने जा रही है. यह अभियान अयोध्या से पार्टी के महासचिव और सांसद सतीश चंद्र मिश्रा की अगुवाई में शुरू हो रहा है. इसके लिए ब्राह्मण सम्मेलन शुरू किए जा रहे हैं. मायावती ने कहा कि अब समय आ गया है कि ब्राह्मण फिर से बसपा के साथ जुड़ जाएं क्योंकि 2007 के चुनाव में ब्राह्मण बसपा के साथ जुड़े थे और प्रदेश में बसपा की सरकार बन गई थी. बसपा ने भी ब्राह्मणों के हितों का पूरा ध्यान रखा था.
बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को कहा है कि ब्राह्मण बीजेपी को वोट देकर पछता रहे हैं. रविवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में ब्राह्मण बीजेपी के बहकावे में आ गए लेकिन अब पछता रहे हैं. आने वाले विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों को फिर से बसपा के साथ आ जाना चाहिए. मायावती ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि ब्राह्मण अगले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को वोट नहीं देंगे.
उन्होंने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस ने दलितों को पिछले चुनाव में बहकाने की खूब कोशिश की थी और उनके साथ खूब खिचड़ी खाई और खिलाई लेकिन उन्हें दलितों पर गर्व है क्योंकि दलित उनके बहकावे में नहीं आए.
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