प्रयागराज। विकास के नाम पर लगातार पेड़ों को काटा जा रहा है। पेड़ों के कटने से जहां पर्यावरण को खतरा बढ़ रहा है हरियाली का दायरा भी घटने लगा है। पेड़ों को कटने से बचाने के लिए वन विभाग भी कोई प्रयास नहीं कर रहा है। हाईटेक दौर में विभाग की ओर से अगर सक्रियता दिखाई जाए तो हजारों पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
पिछले चार वर्षों में विकास के नाम पर प्रयागराज में ही 52 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। अगर हाईटेक तरीके को अपनाया जाता तो पेड़ों को दूसरी जगह शिफ्ट कर बचाया सकता था। पूरे मंडल को देखा जाए तो एक लाख से अधिक पेड़ों की कटाई विकास के नाम पर पांच वर्षों में की जा चुकी है। इस समय विकास के नाम पर कौशाम्बी में महुआ के 86 पेड़ों को कुर्बान करने की तैयारी है। क्षेत्रीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद अब इन पेड़ों के बचाने की कवायद तेज हो गई है। कादीपुर के लोग लगातार 86 महुआ के पेड़ों की कटाई करने का विरोध कर रहे हैं। विरोध का दायरा तेजी से बढ़ने लगा है और अब इन पेड़ों की शिफ्टिंग किए जाने की कवायद वन विभाग की ओर से होने लगी है।
मुख्य वन संरक्षक एन रविंद्रा ने कहा की शासन से भी निर्देश मिला है कि पेड़ों को काटने के बजाय शिफ्ट किया जाए। उसी के तहत पेड़ों को बचाने की कवायद की जाएगी। हालांकि 15 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों को शिफ्टिंग करने में परेशानी होती है। वही वन संरक्षक जीआर अहिरवार ने कहा कि लोगों का जिस तरह से पेड़ों को लेकर जागरूकता बढ़ी है उससे विभाग पेड़ों को काटने के बजाय शिफ्टिंग कराने की विशेष योजना तैयार कर रहा है। योजना सफल हो गई तो हर वर्ष हजारों पेड़ कटने से बच जाएंगे। बताया कि शिफ्टिंग के माध्यम से उन्होंने आगरा में अपनी देखरेख में 1500 से अधिक पेड़ों को 2015 में बचा लिया था। उस समय वहां पर में वन निगम में था यही प्रयास यहां के पेड़ों के लिए किया जाएगा और इन्हें सुरक्षित दूसरे स्थान पर पहुंचाया जाएगा।
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