प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि सर्विस बुक में दर्ज जन्मतिथि कर्मचारी और नियोजक दोनों पर बाध्यकारी है। इसमें सेवानिवृत्ति के बाद परिवर्तन नहीं किया जा सकता। जन्मतिथि को सेवानिवृति के बाद पुनरीक्षित करना अतार्किक है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने संग्रह अमीन पद से 2015 में सेवानिवृत्त बचन सिंह की याचिका पर दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने याची से पांच साल के वेतन (27,85,388 रुपये) की वसूली आदेश व प्रक्रिया पर रोक लगा दी है और कहा कि याची से वसूली नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 23 में बेगार लेने पर रोक है। याची से अधिक समय तक काम लिया गया और वेतन नहीं दिया जाता तो यह बेगार होगा। उसे अधिक समय तक काम करने का वेतन पाना चाहिए और वसूली की जा रही है।
कोर्ट ने प्रथमदृष्टया एसडीएम के आदेश को विधि विरुद्ध करार दिया है और जवाब मांगा है। कोर्ट से एसडीएम शिकोहाबाद को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण कार्य करने के लिए उचित कार्यवाही की जाए। याची 31 अक्तूबर 2015 को सेवानिवृत्त हुआ। सर्विस बुक में हाईस्कूल प्रमाणपत्र के आधार पर उसकी जन्मतिथि 10 अक्तूबर 1955 दर्ज है। एसडीएम ने हाईस्कूल के पहले की शिक्षा में दर्ज जन्मतिथि 10 अक्तूबर 1950 के आधार पर जन्मतिथि परिवर्तित करने का आदेश दिया और पांच साल अधिक सेवा के वेतन की वापसी का निर्देश दिया। तहसीलदार ने वसूली आदेश भी जारी कर दिया, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है।
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