प्रयागराज : निरंजनी अखाड़ा श्रीपंचायती से निष्कासन के बाद योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने शनिवार को पहली बार बयान जारी किया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि पर उन्होंने खुलकर तो कोई बयान नहीं दिया लेकिन तमाम बातें उन्होंने कह दी हैं। योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने कहा कि अखाड़े की जमीन और सम्पत्ति को लेकर विवाद होते रहे, जिसका उन्होंने विरोध किया। उस पर यह कार्रवाई हुई है। स्वामी आनंद गिरि ने कहा कि इस सम्पत्ति के लिए उनकी जान भी ली जा सकती है।
अपने जानमाल के खतरे को लेकर उन्होंने उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन को पत्र लिखा है। योगगुरु ने कहा कि वर्ष 2019 में आस्ट्रेलिया में जब वो विवाद में आए थे तो उनके नाम पर चार करोड़ रुपये से अधिक उठाया गया था। ऐसे ही सम्पत्ति के कई मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक बार उनके गुरु महंत नरेंद्र गिरि खुद उन्हें उनके घर लेकर गए थे। इसके पूर्व या बाद में वो कभी अपने घर नहीं गए हैं। घर क्या गांव और शहर भी जाना नहीं हुआ है। स्वामी आनंद गिरि का कहना है कि उनकी जान का खतरा है। उन पर दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में किसी भी दिन सुनने को मिल सकता है कि योगगुरु स्वामी आनंद गिरि की हत्या कर दी गई। योगगुरु ने कहा कि उन्होंने हमेशा सनातन धर्म को ही आधार बनाया। कुम्भ में भी वह प्रमुख चेहरा रहे हैं। हालांकि इस बारे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि एक संत के रूप में उनकी जान को कोई खतरा नहीं है। यह सब बातें केवल उत्तराखंड सरकार से सुरक्षा के लिए बोली जा रही हैं। क्योंकि यहां पर सुरक्षा स्वामी नरेंद्र गिरि के कारण मिलती थीं, अब वो सुरक्षा बंद हो जाएगी।
अब सोशल साइट पर शुरू हो गई जंग
योगगुरु स्वामी आनंद गिरि के निरंजनी अखाड़े से निष्कासन के बाद अब सोशल साइट पर जंग शुरू हो गई है। तमाम लोगों ने स्वामी आनंद गिरि के पक्ष में बयान जारी करना शुरू कर दिया है। खुद स्वामी आनंद गिरि ने आई सपोर्ट स्वामी आनंद गिरि जी नाम से फेसबुक पर एक पेज बना लिया है। दोपहर बाद बने इस पेज पर तेजी से फॉलोअर भी बढ़ते जा रहे हैं। स्वामी आनंद गिरि के सोशल साइट पर बड़ी संख्या में फॉलोअर है। वाट्सएप ग्रुपों पर भी लोगों ने बयान जारी कर आनंद गिरि का समर्थन किया है। सोशल साइट्स पर आए बयान में लोगों ने यही कहा है कि ऐसा काम नहीं करना चाहिए था। अगर किसी प्रकार का विवाद था तो इसके लिए दोनों पक्षों को बैठकर बात करनी चाहिए थी। सार्वजनिक मंच पर जो हुआ, वो नहीं होना चाहिए था। वहीं तमाम समर्थकों ने कहा कि अगर योगगुरु ने अपने परिजनों से सम्बंध रखा भी है तो इसमें गलत क्या है। तमाम लोगों ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी स्वामी आनंद गिरि के परिवार वालों को नहीं देखा है।
संत समाज ने काटी कन्नी, कहा-आपसी विवाद
संत समाज ने पूरी तरह से इस विवाद से कन्नी काट ली है। संतों का कहना है कि यह निरंजनी अखाड़े का आपसी विवाद है। इस पर कुछ कहना गलत है। स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी ‘टीकरमाफी का कहना है कि इस प्रकार का बयान आना गलत है। इससे संतों की छवि समाज में धूमिल होती है। जो कार्रवाई हुई है वो दुखी करने वाली है। अगर कोई विवाद था तो बैठकर बात करनी चाहिए थी। गुरु को सजा देने का अधिकार है, लेकिन पहले शिष्य को सुन तो लेना चाहिए था। वहीं काशी सुमेरू पीठ के स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि यह आपसी मामला है। इस पर कुछ कहना गलत है। जो हुआ वह अप्रिय है। किन्नर अखाड़ा प्रमुख स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि हमारे लिए महंत नरेंद्र गिरि भी पूज्यनीय हैं और स्वामी आनंद गिरि भी प्रिय हैं। किन्नर अखाड़ा तो गुरु शिष्य परंपरा से चलता है। ऐसे में गुरु शिष्य के बीच किसी प्रकार का बयान एकदम गलत है। दंडी संन्यासी स्वामी ब्रह्माश्रम ने भी इस पूरे प्रकरण में किसी प्रकार का बयान जारी नहीं किया। उन्होंने इस प्रकरण से खुद को अलग ही रखा है।
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