प्रयागराज : कोरोना वायरस ने भले ही पूरी दुनिया में मौत का तांडव मचा रखा है लेकिन जिंदगी बदस्तूर अपने ही अंदाज में खिलखिला रही है। कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रयागराज के एकमात्र लेवल थ्री स्तर के एसआरएन अस्पताल में जहां सर्वाधिक कोरोना मरीजों की मौत हुई तो वहीं पिछले एक साल के दौरान इसी अस्पताल की छत के नीचे संक्रमित महिलाओं ने लगभग 230 बच्चों को जन्म भी दिया है।
खास बात यह कि इनमें से महज चार बच्चे संक्रमित पाए गए। यही नहीं तीन महिलाओं ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। ये सभी बच्चे और उनकी मां स्वस्थ्य हैं। अत्यधिक संक्रमण के कारण दो महिलाओं की मृत्यु हुई। उनमें से एक के बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका। इसके अलावा 100 से अधिक सामान्य डिलेवरी भी कराई गई। एसआरएन में 12 मई 2020 को पहली संक्रमित महिला की डिलेवरी हुई थी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि एसआरएन अस्पताल में न सिर्फ प्रयागराज बल्कि आसपास के प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, मिर्जापुर और भदोही आदि जिलों की संक्रमित गर्भवती महिलाओं को भी डिलेवरी के लिए भर्ती किया जा रहा है। पिछले महीने अप्रैल में जब कोरोना की दूसरी लहर में सर्वाधिक लोगों की एसआरएन में मृत्यु हुई तो उस दौरान कोरोना संक्रमित 70 और स्वस्थ्य 50 महिलाओं की डिलेवरी हुई।
संक्रमित मां के पास नहीं रहता स्वस्थ बच्चा
डिलेवरी के बाद तुरंत बच्चे की कोरोना जांच कराई जाती है। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद उसे संक्रमित मां को नहीं दिया जाता। बच्चा परिवार को सौंप देते हैं। यदि बच्चा भी संक्रमित मिलता है तो उसे मां के पास ही रखा जाता है हालांकि मां बच्चे को स्तनपान कराने के साथ ही पूरे समय मास्क लगाए रहती है।
इनका कहना है
डॉ. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग मेडिकल कॉलेज कहती हैं पिछले एक साल के दौरान कोरोना संक्रमित महिलाओं ने लगभग 230 बच्चों को जन्म दिया है। हमारे लिए खुशी की बात है कि 99 प्रतिशत से अधिक महिलाएं और बच्चे स्वस्थ्य है। सोसाइटी के हाई प्रोफाइल लोग जो आमतौर पर प्राइवेट अस्पतालों में डिलेवरी करवाना पसंद करते हैं, उनके परिवारों की महिलाओं की डिलेवरी भी एसआरएन में हुई और सभी संतुष्ट होकर गए।
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