आगरा | श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही मस्जिद ईदगाह विवाद का दायरा बढ़ता जा रहा है। अधिवक्ता ने गुरुवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में गुहार लगाई कि मंदिर के मूल विग्रह आगरा किले से लाकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान में रखवाए जाएं। दावा किया कि मंदिर के मूल विग्रह आगरा किले में दीवाने खास की छोटी मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबे हैं। कोर्ट ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए अगली तिथि 19 अप्रैल तय की है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और ईदगाह के मध्य समझौते को गलत बताते हुए वाद दायर है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता महेन्द्र प्रताप ने अदालत में गुरुवार को प्रार्थना पत्र दिया। कहा कि ठाकुर केशवदेव महाराज विराजमान मंदिर कटरा केशवदेव का भव्य प्राचीन मंदिर उपरोक्त परिसर में था। परिसर का रकबा 13.37 एकड़ है। मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर तुड़वाकर उसके पत्थरों से कुछ भाग में मंदिर सीट पर ईदगाह मस्जिद का ढांचा खड़ा करा दिया। इसमें ठा. केशवदेव मंदिर के हिन्दू स्थापत्य कला व मांगलिक चिह्न वाले पत्थरों को पलटकर ढांचे के निर्माण में लगाया गया। कुछ स्थानों पर पत्थर सीधे भी लगे हैं। इसके लिए कमीशन जारी कर रिपोर्ट मंगाए जाने की याचना पूर्व में की गई है। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि औरंगजेब द्वारा मंदिर का विध्वंस कराकर उसमें मौजूद रत्नजड़ित प्रतिमाओं, मुख्य विग्रह भगवान श्रीकृष्ण व अन्य विग्रहों को आगरा के लालकिले में मौजूद दीवानेखास की छोटी मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबा दिया गया। प्रार्थना पत्र में दावा है कि इतिहासकारों ने इसका उल्लेख किया है। अदालत से कहा गया कि उक्त मूल विग्रहों को वहां से निकलवाया जाए और उन्हें कटरा केशवदेव में वर्तमान परिसर के किसी भाग में बतौर साक्ष्य संरक्षित कराया जाए। 19 अप्रैल को अमीन कमीशन, यथा स्थिति, रिसीवर और आर्किलोजिकल सर्वे पर भी अदालत में सुनवाई होनी है। अखिल भारत हिन्दू महासभा का वाद हुआ स्वीकार मथुरा। ठाकुर केशवदेव जी महाराज विराजमान को लेकर अखिल भारत हिन्दू महासभा के उपाध्यक्ष अनिल कुमार त्रिपाठी द्वारा बुधवार को अदालत में दायर किए वाद को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। अधिवक्ता दीपक शर्मा ने बताया कि अदालत ने उनके वाद को स्वीकार करते हुए उसे दर्ज कर लिया है। अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 6 मई की तिथि निर्धारित की है।
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