प्रयागराज। प्रभु यीशु के त्याग और बलिदान के दिन गुड फ्राइडे पर एक बार फिर क्रूस पर प्रभु यीशु के कहे गए अन्तिम सात वचन चर्च में गूंजे। सात वक्ताओं ने आज के परिवेश के साथ जोड़ते हुए इन सात वचनों को व्यक्त किए।
सेंट पीटर्स चर्च म्योराबाद के पादरी और डायसिस ऑफ लखनऊ के सचिव रेव्ह प्रवीण मैसी ने प्रार्थना के दौरान बताया कि प्रभु यीशु के वाक्य हमें सहज होना सिखाते हैं। क्रूस पर कहा गया उनका पहला वचन क्षमा और त्याग को दर्शाता है। दूसरा वचन प्रमाणित करता है कि बुरा चाहने वालों के साथ भी अच्छा करो, उनके लिए अच्छा सोचो। तीसरा वचन अपने माता-पिता की चिंता करना सिखाता है। चौथा वचन हमें आगाह करता है कि आधुनिकता में इतना आगे न जाएं कि परमेश्वर और अच्छे कार्यों को भूल जाएं, क्योंकि ये जीवन जिसने दिया है हमें उसके पास वापस भी जाना है। पांचवां वचन बताता है कि प्रभु हमारे प्यार के प्यासे हैं, प्रभु भक्त का श्रद्धा रूपी जल चाहते हैं। छठे वचन का अर्थ है कि अपने जीवन के उद्देश्यों और मूल्यों से न भटकें। इसकी परिणति में सातवां वचन प्रकृति के साथ खुद को सायुज्य करना सिखाता है।
लाल गिरिजाघर में रेव्ह अमिताभ राय, सेंट पॉल्स चर्च में रेव्ह एसपी लाल, नैनी चर्च में रेव्ह जितेन्द्र नाथ, जमुना चर्च में रेव्ह एम डिकोस्टा, पत्थर गिरजाघर में बिशप पीटर बलदेव की मौजूदगी में प्रार्थना हुई। इन सभी चर्च में 12 से 3 बजे के बीच हुई प्रार्थना के समय प्रभु यीशु के सात वचनों से मसीही समाज को रूबरू कराया गया। सेंट जोसफ कैथेड्रल में सुबह 7 बजे, 9 बजे और शाम 6 बजे गुड फ्राइडे की सर्विस हुई। बड़ी संख्या में प्रार्थनाओं से भक्त ऑनलाइन जुड़े।
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