महिला शशक्तिकरण कि आवाज कितनी बुलंद हो चुकी है कि भारत कि विराट हिन्दू संस्कृति के रक्षा के लिए शंकराचार्य द्वारा स्थापित तेरह अखाड़ों के अंदर अब अलग से महिला अखाड़े के रूप में भी जोर पकड़ने लगी है । अलग अलग सम्प्रदायों से जुडी पहले इन महिला संतों ने महाकुम्भ में इसकी रूपरेखा तैयार कि जहाँ पर इन्हे इनके पारम्परिक नाम माई बाड़ा से अलग सन्यासी अखाड़े के रूप में मान्यता प्राप्त कि अब ठीक एक साल बाद प्रयाग में इसकी अलख एक महिला साधू त्रिकाल भवन्ता जगाई जहाँ ये तेरह तारीख को चतुर्दशी को महिला संतों के साथ जुलुस निकाल कर गंगा पूजन करेंगी और उसके बाद अखाड़े का एलान कर देंगी । अपने आप को शंकराचार्य कहने वाली गायत्री पीठ के इस कदम के बाद अखिल भारतीय अखाड़े में इसका तीखा विरोध शुरू हो गया है । निरंजनी अखाड़े के महंत नरेंद्र गिरी ने साफ़ साफ़ कहा कि उनके यहाँ महिला संतों का हमेशा पूरा सम्मान किया गया है लेकिन ऐसा सम्भव कि तेरह कि जगह चौदह अखाडा बने ।
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